
टीकमगढ़। जिले में इन दिनों दुराचार और अपहरण जैसी वारदातों में अचानक हुई वृद्धि ने जन सामान्य में असंतोष बढ़ाने का कार्य किया है। महिलाओं और युवतियों के साथ ही अन्य लोगों में भी नाराजगी पनपने लगी है। ऐसे में एक नौ वर्षीय बालिका के साथ किए गए दुराचार के मामले में आए फैसले ने लोगों में राहत पहुंचाने का काम किया है। इस घटना के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने से इस तरह की वारदातों को अंजाम देने वालों में भी खौफ का वातावरण निर्मित होना तय माना जा रहा है। लोगों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए विद्धान न्यायाधीश सहित कार्रवाई से जुड़े पुलिस कर्मचारियों के प्रयासों की भी सराहना की है। यहां बता दें कि जिले में तेज तर्रार थाना प्रभारी रहे हिमांशु भिंडिया एवं उप निरीक्षक नीतू खटीक द्वारा मामला दर्ज कर आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की थी, जिस पर लोगों ने उनकी सराहना की है। बताया गया है कि नरेंद्र कुमार गुप्ता विशेष न्याययाधीश पॉक्सो एक्ट टीकमगढ़ मप्र द्वारा यह फैसला सुनाया गया है। मामले की पैरवीकर्ता श्रीमती नर्मदांजलि दुबे, विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो एक्ट टीकमगढ़ एवं विवेचक निरीक्षक हिमांशु भिंडियाए, उप निरीक्षक नीतू खटीक रहे। दुराचार के आरोपी का नाम संजीव कुमार उर्फ संजय अहिरवारए उम्र 27 वर्ष निवासी थाना जतारा जिला टीकमगढ़ बताया गया है। बताया गया है कि इस मामले में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक नर्मदांजलि दुबे द्वारा की गई। विशेष लोक अभियोजक द्वारा घटनाक्रम के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि मामला थाना जतारा जिला टीकमगढ़ का होकर माननीय विशेष न्यारयाधीश (पॉक्सो एक्ट) टीकमगढ़ के न्यावयालय में विचाराधीन था, जिसमें विशेष न्यायाधीश द्वारा 9 वर्षीय बालिका के साथ बलात्संग के आरोप में आरोपी को दोषी पाते हुये धारा 5(ड)/ 6 पॉक्सो एक्टे में आजीवन कारावास एवं 1 हजार रूपये का अर्थदण्ड ए, धारा 363 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 रूपये अर्थदण्ड तथा धारा 506 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 रूपये अर्थदण्डे से दण्डित किया गया है ।
दुराचारी ने दी जान से मारने की धमकी-
प्रकरण का संक्षिप्त विवरण देते हुए बताया गया है कि घटना 18 अक्टूबर 2022 को प्रकरण की अभियोक्त्री की मां द्वारा थाना जतारा में जाकर यह सूचना दी कि उसकी बेटी सुबह स्कूल पढऩे गई थी, दोपहर करीब 1.30 बजे उसे अभियोक्त्रीय के रोने की आवाज आयी, तो उसने घर के पीछे जाकर देखा, तो उसकी 9 वर्ष की बच्ची र्निवस्त्र अवस्था में रोते हुई आ रही थी, जब उसने अपनी बच्ची से कपड़ों के बारे में एवं रोने का कारण पूँछा, तब उसने बताया कि जब वह स्कू ल से घर आ रही थी तब रास्ते में उसे संजय मिला था और उसे कन्या भोज के बहाने अपने घर ले गया, जहां उसे कमरे में बंद करके उसके साथ गलत काम किया। उसके रोने पर आरोपी संजय ने उसे धमकाते हुए जान से मारने की धमकी दी ।
भिंडिया और नीतू ने की थी कार्रवाई-
बताया गया है कि अभियोक्त्री की मां द्वारा की गई शिकायत पर थाना जतारा में महिला उप निरीक्षक नीतू खटीक द्वारा मामले की प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध करते हुए घटना के संबंध में अभियोक्त्री और उसकी मां के कथन उनके बताये अनुसार लेखबद्ध किए । विवेचना के दौरान जतारा थाना में पदस्थ निरीक्षक हिमांशु भिंडिया द्वारा घटना स्थल पर जाकर साक्षीगण की उपस्थिति में नक्शाा मौका तैयार करते हुए सभी आवश्यक साक्षीगण के कथन लेखबद्ध किए तथा अभियुक्त संजय को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायालय द्वारा अभियुक्त को जेल भेजा गया । अभियोक्त्रीं एवं आरोपी का मेडीकल कराकर प्राप्त नमूनों को जांच हेतु एफएसएल भेजा गया।
23 दस्तावेजों व डीएनए का रहा आधार-
संपूर्ण विवेचना उपरांत आरोपी संजय के विरूद्ध विचारण चलाये जाने हेतु अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया । विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा प्रकरण में अभियोक्त्री, उसके माता, पिता, डॉक्टंर एवं विवेचक सहित कुल 11 साक्षीगण को परीक्षित कराया गया एवं 23 महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एवं प्रकरण में प्राप्त डीएनए रिपोर्ट को वैज्ञानिक साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किया गया । अभिलेख पर अभियोजन द्वारा प्रस्तुत की गई मौखिक, दस्ता वेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्या तथा अंतिम तर्क के आधार पर विशेष न्यायाधीश द्वारा बालिका के साथ बलात्संग के आरोपी संजय अहिरवार को दोषी पाते हुये धारा 5 (ड)/ 6 पॉक्सो एक्ट में आजीवन कारावास एवं 1 हजार रूपये का अर्थदण्ड धारा 363 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 रूपये अर्थदण्ड तथा धारा 506 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 500 रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है ।








