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पर्युषण पर्व के तीसरे दिन आज मनेगा उत्तम आर्जव धर्म

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मन, वचन, कार्य में समानता ही उत्तम आर्जव धर्म है

छतरपुर। जैन धर्मावलंबियों द्वारा आत्मशुद्धि का दस दिवसीय पर्यूषण पर्व नगर में पूरी धार्मिक प्रभावना के साथ मनाया जा रहा है। आज 10 सितंबर को पर्युषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म धार्मिक प्रभावना के साथ मनाया जाएगा। पर्युषण पर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा तथा दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म मनाया गया।प्रो. सुमति प्रकाश जैन के अनुसार धर्म के दस लक्षण उत्तम क्षमा धर्म, उत्तम मार्दव धर्म, उत्तम आजर्व धर्म, उत्तम शौच धर्म, उत्तम सत्य धर्म, उत्तम संयम धर्म, उत्तम तप धर्म, उत्तम त्याग धर्म, उत्तम आकिंचन धर्म, उत्तम ब्रहचर्य धर्म होते हैं, जिनका पालन पर्युषण पर्व पर श्रावक करते हैं। इस प्रकार धर्म के इन दस पर्वों को पर्युषण पर्व के रूप में जैन श्रावक बड़े धूमधाम से मनाते है। उत्तम क्षमा धर्म के दिन विगत में हुई जानी अंजानी भूलों के प्रति परस्पर क्षमापना की गई। उत्तम मार्दव धर्म के दिन किसी भी चीज पर मान, अभिमान, कषाय आदि न कर जीवन में मृदुलता और सरलता लाने का संदेश दिया गया।प्रो. जैन ने बताया कि आज पर्युषण पर्व का तीसरा दिवस है, जो उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया जाएगा। आर्जव का मतलब क्या है? जीवन में सरलता आ जाना ही उत्तम आर्जव है। ऋजुता के भाव होना ही आर्जव है। हमारे जीवन में ऋजुता तभी आएगी जब हम अन्दर बाहर से एक हो जाये। मन, वचन, कार्य में समानता आना ही आर्जव भाव है। हमारे भावों में जितनी सरलता आती जाएगी हमारी दुर्गतियों का नाश होता जाएगा। शास्त्र में कहा भी गया है कि उत्तम आर्जव कपट मिटावे, दुर्गति त्याग सुगति उपजावे।पर्युषण पर्व पर नगर के सभी जैन मंदिरों में अल सुबह पौने सात बजे से श्रीजी का पूजन, शांतिधारा, अभिषेक प्रारंभ हो जाता है। श्रद्धालु पवित्र पीले वस्त्रों में भगवान का पूजन और अभिषेक पूरे मनोयोग से करते हैं। श्रवण संस्कृति संस्थान सांगानेर, राजस्थान से पधारे विद्वान जितेन्द्र शास्त्री सुबह एवं शाम को अपने प्रवचनों में धर्म का मर्म समझाते हैं। नगर के जैन मंदिरों पर मनमोहक विद्युत साज सज्जा की गई है।

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