टीकमगढ़। लंबे समय से सुर्खियों में बने स्थानीय पीजी कालेज में की जा रही गड़बडिय़ों एवं भ्रष्टाचार पर से आखिर पर्दा हट गया है। यहां लोकायुक्त टीम ने एक बाबू को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा और वैधानिक कार्रवाई की। अचानक पहुंची लोकायुक्त टीम के बाद महाविद्यालय परिसर में सनसनी फैल गई। कर्मचारियों एवं लोगों की मौजूदगी में यहां चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर चर्चाएं गर्म हो गई। बताया गया है कि एक सेवा निवृत्त कर्मचारी के बेटे देवेन्द्र बाल्मीकि की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। इस संबन्ध में मिली जानकारी के मुताबिक यहां के शासकीय महाविद्यालय में अचानक उस समय खलबली मच गई, जब यहां पहुंची लोकायुक्त टीम ने बाबू नितिन मिश्रा को एक लाख रूपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। शिकायतकर्ता देवेन्द्र बाल्मीकि ने बताया कि उसके पिता हरिकिशन बाल्मीकि कालेज में स्वीपर थे और हाल ही में सेवा निवृत्त हुए हैं। उनके एरियर, अर्जित अवकाश और समयमान वेतनमान के भुगतान की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में बाबू नितिन मिश्रा द्वारा दो लाख रूपए की मांग की गई थी। जिसमें से एक लाख रूपए उसे दिए जा रहे थे। इतना ही नहीं देवेन्द्र को नौकरी दिलाने के एवज में भी पचास हजार रूपए अलग से मांगे गए थे। बताया गया है कि पूर्व में पहली किश्त सात मई को ही दी गई थी। मंगलवार को जैसे ही बाबू को एक लाख रूपए की दूसरी किश्त दी गई कि बाबू नितिन मिश्रा को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। लोकायुक्त निरीक्षक कमल सिंह सहित टीम के अन्य सदस्यों ने कार्रवाई को अंजाम दिया। कहा तो यह भी जा रहा है कि इतनी बढ़ी रकम केवल बाबू द्वारा पचा पाना संभव नहीं लगता। इस मामले में और कौन-कौन शामिल हैं, इसका पता लगाया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने तो प्राचार्य सहित कुछ और कर्मचारियों के शामिल होने के आरोप लगाए हैं। ज्ञात हो कि कालेज में नियुक्तियों से लेकर अन्य कार्यों के दौरान भी गड़बडिय़ों के आरोप लगाए जाते रहे हैं। कालेज कर्मचारियों एवं तत्कालीन प्राचार्य द्वारा यहां अपने ही परिजनों को लाभान्वित किए जाने के मामले सामने आते रहे हैं। अब देखना है कि चर्चित होते जा रहे महाविद्यालय की छवि को बेहतर बनाने की दिशा में शासन एवं प्रशासन द्वारा क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।










