
महाराजपुर। बुंदेलखंड में सैकड़ों गांव ऐसे हैं जहां के लोगों को दो वक्त की रोटी के लिए अपना घर-परिवार को छोड़कर महानगरों की ओर जाना पड़ रहा है। यह परंपरा सदियों पहले भी थी लेकिन आज के बदलते हुए परिवेश में भी पलायन की परंपरा नहीं बदली है। भले ही शासन-प्रशासन सैकड़ों घोषणाएं करता हो लेकिन समस्या आज भी जस की तस है।ताजा मामाला जिले के महाराजपुर क्षेत्र का जहां के सैकड़ों लोग पलायन कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि दिवाली के बाद से महाराजपुर नगर से लगातार पलायन हो रहा है। नगर के वार्ड नंबर 2 में रहने वाले प्रजापति समाज के दर्जनों परिवार रोजी-रोटी की तलाश में पलायन कर चुके हैं। स्थानीय निवासी मनोज प्रजापति बताते हैं कि भूख मिटाने के लिए मजबूरी में इन परिवारों को अपने घर छोड़कर जाना पड़ता है। शासन-प्रशासन की योजनाएं तो बहुत सारी हैं लेकिन जब उनका लाभ लेने के लिए हम जाते हैं जब तीन-चार सौ रुपए की मजदूरी मिलती है ऐसे में पलायन करना ही एकमात्र विकल्प बचता है। प्रजापति समाज के अलावा नगर और आसपास के ग्रामीण अंचलों के रहने वाले अन्य सैकड़ों परिवार भी पलायन कर चुके हैं।









