छतरपुर। बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में अंधविश्वास और झाड़-फूंक के बजाय समय पर अस्पताल पहुंचना जीवन बचाने में अहम साबित हो सकता है। जिला अस्पताल छतरपुर में डॉक्टरों की तत्परता से ग्राम बलकोरा निवासी 12 वर्षीय बच्चे की जान बचाई गई।
जानकारी के अनुसार, दो रोज पूर्व परिजन बच्चे को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। बच्चे को रात से पेट और सीने में तेज दर्द के साथ उल्टियां हो रही थीं। शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता चौरसिया ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल आईसीयू में भर्ती कर वेंटीलेटर पर उपचार शुरू किया।
बच्चे के लक्षणों की बारीकी से जांच करने पर सर्पदंश की आशंका हुई। पूछताछ और जांच के दौरान पता चला कि बच्चे को रात में सोते समय कॉमन करैत नामक जहरीले सांप ने काटा था। जांच करने पर शरीर पर सर्पदंश के निशान भी मिले। इसके बाद डॉक्टर ने बिना देरी किए एंटी स्नेक वेनम का उपचार शुरू किया। समय पर उपचार मिलने से बच्चे की हालत में सुधार हुआ और अब वह पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा है।
डॉ. श्वेता चौरसिया ने लोगों से अपील की कि बरसात के मौसम में सांप घरों और आसपास के क्षेत्रों में निकल सकते हैं। सर्पदंश की घटना होने पर झाड़-फूंक या किसी तरह के अंधविश्वास के चक्कर में समय बर्बाद न करें। पीडि़त को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाएं। समय पर चिकित्सकीय उपचार और एंटी स्नेक वेनम मिलने से सर्पदंश के मरीज की जान बचाई जा सकती है।










