Home डेली न्यूज़ अधिवक्ताओं का तीखा विरोध, कलेक्ट्रेट में घुसे, मोची को ज्ञापन दिया

अधिवक्ताओं का तीखा विरोध, कलेक्ट्रेट में घुसे, मोची को ज्ञापन दिया

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छतरपुर। शिवपुरी जिले के करैरा में 14 फरवरी को दिनदहाड़े अधिवक्ता संजय कुमार सक्सेना की गोली मारकर हत्या के विरोध में छतरपुर जिला अधिवक्ता संघ के सदस्य आज सड़कों पर उतर आए। अधिवक्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया, लेकिन किसी अधिकारी ने आवेदन नहीं लिया। लंबे इंतजार के बाद नाराज अधिवक्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की और फिर सड़क पर निकलकर आकाशवाणी तिराहे पर चक्का जाम कर दिया। इस दौरान कुछ अधिवक्ता कपड़े उतारकर सड़क पर लेट गए। लगभग दो घंटे तक जाम लगाए रहने के बाद अधिवक्ताओं ने आपसी सहमति बनाई और छत्रसाल चौराहे पर आकर जूता पॉलिश करने वाले मोची को ज्ञापन सौंपा।प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कलेक्टर खुद आएं और उनका ज्ञापन लें, तभी वे जाम खोलेंगे। इस दौरान अधिवक्ताओं ने कलेक्टर के पुतले को जलाने की कोशिश की और जमकर नारेबाजी की। वे अधिवक्ताओं की सुरक्षा, एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने और हत्यारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष शिवप्रताप सिंह ने कहा कि राज्य अधिवक्ता संघ द्वारा हमें निर्देश दिए गए थे कि शिवपुरी में हुई अधिवक्ता की हत्या के विरोध में हमें शांतिपूर्ण तरीके से जिला प्रशासन को ज्ञापन देना है। हम लोग कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देने जा रहे थे तभी वहां पुलिस आ गई और बैरीकेट लगा दिए। क्या हम लोग पहली बार आवेदन देने जा रहे थे? क्या हम लोग अपराधी हैं जो इस तरह से हमें ज्ञापन देने से रोका जा रहा है? आज हमें ज्ञापन देने से रोका जा रहा है, कलेक्टर ने ज्ञापन नहीं लिया। इस कारण से मजबूर होकर हमें चौबे तिराहा पर जाम लगाकर बैठना पड़ा। हम सभी अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि कलेक्टर को बर्खास्त करने राज्य अधिवक्ता परिषद को लेख किया गया है।प्रशासन की ओर से जिला पंचायत सीईओ नम:शिवाय अरजरिया ने सफाई देते हुए कहा कि आज छतरपुर जिले के बार संघ द्वारा शिवपुरी में हुई एक घटना को लेकर ज्ञापन देने के लिए अधिवक्ता कलेक्ट्रेट परिसर में आए थे। उस समय साप्ताहिक टीएल की मीटिंग चल रही थी। पूर्व में अधिवक्ताओं द्वारा ऐसी कोई सूचना नहीं दी गई थी। जब अधिवक्ताओं के द्वारा यह कहा गया कि हमें सिर्फ कलेक्टर से ही मिलना है तब उन्हें विशिष्ट वर्ग मानते हुए मैं स्वयं वहां पहुंचा। ज्ञापन लेने के लिए प्रतिदिन एक अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाती है लेकिन विशिष्ट समुदाय को देखते हुए मैं वहां स्वयं मौके पर पहुंचा लेकिन मुझे ज्ञापन नहीं दिया गया और फिर अधिवक्ताओं द्वारा जाम लगाया गया। जो लगभग एक से डेढ़ घंटे बाद पब्लिक की सुविधा को देखते हुए यह जाम खोल दिया गया।

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