छतरपुर। विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार जरूरी है। आजादी के अमृत महोत्सव के बाद, भारत सरकार विमानन क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रही है, जिसमें उड़ान परियोजना के तहत 220 से अधिक एयरपोर्ट स्थापित करने का लक्ष्य शामिल है। इसी क्रम में, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगाँव-मानस क्षेत्र में ब्रिटिश काल का एक पुराना एयरपोर्ट पुनर्जीवित करने की मांग तेज हो रही है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इसे जन-मानस एयरपोर्ट के नाम से संचालित करने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश काल के साक्ष्यों से सजा छतरपुर जिले का नौगाँव शहर, कभी छावनी के नाम से जाना जाता था। शह छतरपुर जिले का एक प्रमुख शहर होने के साथ-साथ तहसील मुख्यालय भी है। 19वीं शताब्दी में भारत की टॉप-10 सैन्य छावनियों में से एक नौगांव, बुंदेलखंड एजेंसी का ब्रिटिश मुख्यालय था, जहां से ओरछा, पन्ना, छतरपुर और दतिया की रियासतों को नियंत्रित किया जाता था। ब्रिटिश शासन में यहां व्यावसायिक-सैन्य एयरपोर्ट विकसित हुआ, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कोहिमा (असम) और बर्मा (म्यांमार) के युद्धक्षेत्रों के लिए सहायक लैंडिंग स्ट्रिप था। एयरपोर्ट के पास सैन्य फील्ड अस्पताल था, जो युद्ध घायलों का इलाज करता था लेकिन आजादी के बाद यह एयरपोर्ट गैर-सक्रिय हो गया। स्थानीय लोग अब इसे पुन: संचालित करने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि नौगाँव पर्यटन, कृषि और व्यापार का केंद्र है। खजुराहो एयरपोर्ट यहां से 45 किमी दूर है और सीमित उड़ानों पर चल रहा है, ऐसे में नौगांव के गैर-सक्रिय एयरपोर्ट का पुन: संचालन लाभकारी सिद्ध हो सकता है। उत्तरप्रदेश के झांसी का किला, ओरछा के महल जैसे पर्यटन स्थलों पर जाने में भी लोगों को मदद मिलेगी। नौगाँव-मानस एयरपोर्ट का पुनर्विकास केवल विकास नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरोहर और सामाजिक न्याय की बहाली होगी।










