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बुंदेली टार्जन धर्मेंद्र पटेल, गरीबी, संघर्ष और जुनून से ओलंपिक गोल्ड तक का सपना

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छतरपुर। जिले का एक 28 वर्षीय युवक धर्मेंद्र पटेल आज अपने हौसले और जुनून की वजह से बुंदेली टार्जन के नाम से जाना जाता है। बचपन से ही उसके दिल में सिर्फ एक सपना पल रहा है—देश के लिए कुछ बड़ा करना। गरीबी, अभाव और जिम्मेदारियों के बावजूद धर्मेंद्र का जुनून आसमान से भी ऊँचा है।
धर्मेंद्र की कहानी बेहद मार्मिक और प्रेरणादायी है। आठ साल की छोटी उम्र से ही उन्होंने दौडऩा शुरू किया था। सपना था फौज में भर्ती होकर देश की सेवा करना। मेहनत और लगन से वह भर्ती की दौड़ में हमेशा अव्वल रहे, लेकिन थोड़ी सी कम लंबाई ने उनका यह सपना तोड़ दिया, पर धर्मेंद्र ने हार नहीं मानी। उन्होंने ठान लिया कि अगर सैनिक बनकर देश की सेवा नहीं कर पाए, तो ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करेंगे।
धर्मेंद्र का दावा है कि वह 100 मीटर की दौड़ 10 सेकंड में पूरी कर लेते हैं और 200 मीटर मात्र 21 सेकंड में। उनका कहना है कि अगर उन्हें उचित ट्रेनिंग और सही डाइट मिल जाए, तो वे 100 मीटर का विश्व रिकॉर्ड (9.30 सेकंड) भी तोड़ सकते हैं। अब तक धर्मेंद्र ने 28 प्रतियोगिताओं में भाग लिया है, जिनमें से 26 में वह विजेता रहे और कई पदक व पुरस्कार जीत चुके हैं। लेकिन उनका असली सपना सिर्फ एक है ओलंपिक गोल्ड।
धर्मेंद्र का संघर्ष प्रेरणा देता है। सुबह से ही वह कई किलोमीटर दौड़ लगाते हैं, पहाड़ों पर दौड़कर चढ़ते हैं, लकड़ी, टायर और रस्सियों से कठिन अभ्यास करते हैं। यहां तक कि ट्रैक्टर को रस्सी से बाँधकर अपने कंधे पर खींचते हुए 200 मीटर तक दौड़ जाते हैं। यह सब देखकर गाँव वाले दंग रह जाते हैं।
गरीबी के चलते धर्मेंद्र को कभी पौष्टिक आहार या ड्राई फ्रूट्स नसीब नहीं हुए। घर में जो भी मिल जाता है, उसी से पेट भरकर वे अभ्यास जारी रखते हैं। उनकी शादी महज 12 साल की उम्र में कर दी गई थी, क्योंकि माँ को ब्लड कैंसर था और वे अपने जीते-जी बेटे की शादी देखना चाहती थीं। आज धर्मेंद्र के दो बच्चे हैं, पिता गंभीर किडनी रोग से पीडि़त हैं,कभी होटल में काम करके, तो कभी मज़दूरी करके धर्मेंद्र अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। कई बार पत्नी उनसे कहती हैं कि यह सब छोड़कर कोई काम-धंधा करो, लेकिन धर्मेंद्र का जुनून और आत्मविश्वास अटूट है। उन्हें यकीन है कि एक दिन उन्हें वह सुनहरा मौका मिलेगा, जब वे ओलंपिक में भारत के लिए दौड़ेंगे और गोल्ड मेडल जीतकर देश का सिर गर्व से ऊँचा करेंगे।

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