छतरपुर। शहर के श्री मोटे के महावीर मंदिर परिसर में संत शरीर आश्रम के प्रमुख कमलेश गुप्ता उर्फ कमलेश बब्बा जू की मृत्यु के बाद उनकी देह को दफनाए जाने से शुरू हुआ विवाद अभी थम नहीं है। मंदिर समिति और भक्तों द्वारा लगातार इसका विरोध किया जा रहा है। इसी क्रम में मंदिर समिति और भक्तों ने समाधी को धार्मिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए मंदिर परिसर में मंदिर बचाओ-कब्र हटाओ और कब्र से लौटकर मंदिर में प्रवेश वर्जित लिखे होर्डिंग्स लगवाए हैं। मंदिर समिति का आरोप है कि यह केवल संपत्ति हड़पने का षड्यंत्र है, और कुछ नहीं।
यह है मामला
उल्लेखनीय है कि श्री मोटे के महावीर मंदिर परिसर में स्थित संत शरीर आश्रम के प्रमुख कमलेश गुप्ता, जिन्हें कमलेश बब्बा जू के नाम से जाना जाता था, उनका हाल ही में निधन हो गया था। निधन के बाद उनकी देह को आश्रम में ही संत शरीर महाराज की समाधि के पास दफनाया गया और इसे उनकी अंतिम इच्छा बताया गया। श्री मोटे के महावीर मंदिर समिति और भक्त शुरुआत से ही इस समाधि का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह समाधि धार्मिक परंपराओं और मंदिर की पवित्रता के खिलाफ है। मंदिर समिति ने पहले दिन ही कमलेश गुप्ता की देह को दफनाए जाने पर रोक लगाने और समाधि निर्माण न करने की मांग की थी। इसके लिए जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा गया, लेकिन मांगों को दरकिनार कर देह को आश्रम परिसर में ही दफना दिया गया। इस घटना के बाद से मंदिर समिति और भक्तों का विरोध और तेज हो गया है। समिति ने मंदिर परिसर में होर्डिंग्स लगवाए, जिनमें मंदिर बचाओ-कब्र हटाओ और कब्र से लौटकर मंदिर में प्रवेश वर्जित लिखा है। मंदिर समिति का कहना है कि यह होर्डिंग्स मंदिर की पवित्रता को बनाए रखने और जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं।
पुजारी ने कहा- कब्र पर गए तो मंदिर में नहीं मिलेगा प्रवेश
इस मामले में श्री मोटे के महावीर मंदिर के पुजारी पं. दिनेश प्रसाद शुक्ला ने कहा कि हमने ये होर्डिंग्स इसलिए लगवाए क्योंकि जनता को इसकी जानकारी नहीं है। एक व्यक्ति की देह को मंदिर परिसर में दफन करना धार्मिक रूप से गलत है। यदि कोई कमलेश गुप्ता की कब्र पर जाएगा, तो उसे मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। हमने इस कदम का भरपूर विरोध किया, लेकिन प्रशासन ने हमारी नहीं सुनी। यह सब संपत्ति हड़पने का षड्यंत्र है। वहीं स्थानीय भक्त आनंद कुमार शर्मा ने कमलेश गुप्ता की साधु-संत के रूप में पहचान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, कमलेश गुप्ता कोई साधु-संत नहीं थे। एक गिरोह सक्रिय है, जो पहले संकट मोचन और जानराय टौरिया की संपत्ति हड़प चुका है। अब इस गिरोह की नजर मोटे के महावीर मंदिर की संपत्ति पर है, जिसके द्वारा इस विवाद को जानबूझकर जन्म दिया गया है। एक अन्य भक्त भवानी प्रसाद त्रिपाठी ने भी कमलेश गुप्ता को बनावटी संत करार देते हुए कहा, उन्हें जबरन यहां दफनाया गया, जो पूरी तरह गलत है। न उनका धर्म संत जैसा था, न कर्म। हम सभी भक्त इसके खिलाफ हैं।










