
छतरपुर। लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में शहर के गांव की देवी मंदिर प्रांगण में भव्य समापन समारोह आयोजित हुआ। वर्षभर चले प्रेरणादायक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद इस त्रिशताब्दी वर्ष का समापन समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के साथ हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत अहिल्याबाई के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। संयोजिका बरखा मिश्रा ने स्वागत भाषण में कहा, लोकमाता अहिल्याबाई न केवल एक कुशल शासिका थीं, बल्कि नारी शक्ति और सुशासन की प्रतीक थीं। उनकी सामाजिक समरसता और न्यायप्रियता आज भी प्रासंगिक है। मुख्य वक्ता बीरेंद्र असाटी ने उनके जीवन और लोककल्याणकारी कार्यों पर प्रकाश डाला, जिसमें नारी सुरक्षा टोलियां, महिला सैन्य टुकड़ी, संपत्ति में महिलाओं का अधिकार, विधवा पुनर्विवाह और दत्तक पुत्र लेने का अधिकार जैसे क्रांतिकारी कदम शामिल थे। मुख्य अतिथि संघ के सह विभाग संघचालक गुरुप्रसाद अवस्थी ने कहा, अहिल्याबाई नारी सम्मान और सुरक्षा के प्रति संवेदनशील थीं। उन्होंने अपना राज्य भगवान शिव को समर्पित कर स्वयं को निमित्त माना। उनके आदेशों पर केवल श्रीशंकर की राजमुद्रा अंकित होती थी। कार्यक्रम में श्रुति शर्मा ने अहिल्याबाई पर गीत प्रस्तुत किया, जबकि बालिकाओं ने उनकी जीवनी पर आधारित नृत्य नाटिका पेश की। संचालन योगेश सिन्हा ने किया, और सह-संयोजिका तरुणा चौहान ने आभार व्यक्त किया। मधुकर राष्ट्रोत्थान समिति के अध्यक्ष शिवसहाय राजपूत, शिवेंद्रजी, पवन मिश्रा, सुधीर अरजरिया, दीपाली चौधरी, ज्ञानू अग्रवाल सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया, और स्वल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।









