
।खजुराहो। मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग द्वारा संचालित आदिवर्त जनजातीय लोककला राज्य संग्रहालय में बीती शाम बुंदेलखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की एक अद्भुत झलक देखने को मिली। इस सांस्कृतिक महोत्सव ने दर्शकों को न केवल क्षेत्रीय कला और संगीत से परिचित कराया, बल्कि बुंदेलखंड की लोक परंपराओं को संरक्षित करने का एक शानदार मंच भी प्रदान किया।विभिन्न कलाकारों ने बुंदेली लोकगीतों और अहिराई नृत्य की प्रस्तुति से माहौल को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दिन की खास बात यह थी कि दर्शकों को बुंदेलखंड के प्रसिद्ध लोकगीतों और नृत्य की अद्वितीय प्रस्तुति देखने को मिली। समारोह में प्रमुख कलाकारों के रूप में प्रेमनारायण चौबे, मुकेश जाटव, सुश्री रामवती राजपूत, महेश कुमार मिश्रा, हरचरन श्रीवास और राममिलन यादव ने बुंदेली लोकगीतों का शानदार प्रदर्शन किया, जो क्षेत्र की संस्कृति और लोक जीवन को बखूबी दर्शाते थे। इसके अलावा, समारोह में संतोष कुमार यादव द्वारा प्रस्तुत अहिराई नृत्य ने दर्शकों का दिल छू लिया। इस जीवंत और उर्जावान नृत्य में कलाकारों ने पारंपरिक संगीत के साथ ताल से ताल मिलाकर शानदार प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। संगीत के संदर्भ में, धीरज अहिरवार (ढोलक), रज्जू विश्वकर्मा (बेन्जो), अश्वनी कुशवाहा (हारमोनियम), घनश्याम प्रजापति (नगडिय़ा), पट्टू अहिरवार (झींका), नन्द किशोर कुशवाहा (मंजीरा) और रोहित मिश्रा (आर्गन पेड) ने भी अपनी संगीतमाधुर प्रस्तुतियों से कार्यक्रम की सुंदरता और जीवंतता को और बढ़ाया।









