Home डेली न्यूज़ केन-बेतवा लिंक परियोजना: अब सूखा नहीं, समृद्ध होगा बुंदेलखंड

केन-बेतवा लिंक परियोजना: अब सूखा नहीं, समृद्ध होगा बुंदेलखंड

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प्रधानमंत्री ने किया देश की पहली नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना का शिलान्यास1

खजुराहो। देश की पहली नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना के तहत केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट का शिलान्यास करने आए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इस परियोजना से न केवल बुंदेलखंड सूखे की विभीषिका से ऊपर उठेगा, बल्कि लाखों हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परियोजना रोशनी लेकर भी आ रही है क्योंकि इससे 103 मेगावॉट ऊर्जा का भी निर्माण होगा। रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी पर डाक टिकिट और 100 रुपए का स्मारक सिक्का भी जारी किया। मंच पर साधु-संतों के साथ राज्यपाल मंगूभाई पटेल, केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, डॉ. वीरेन्द्र कुमार, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, जगदीश देवड़ा, मंत्री प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह, तुलसी सिलावट, एंदल सिंह कंषाना, राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार सहित जिले के सभी भाजपा विधायक व संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता मौजूद रहे।स्थानीय मेला ग्राउंड में बनाए गए मंच तक प्रधानमंत्री श्री मोदी खुली जीप में पहुंचे, जिससे वे वहां बैठी अपार जनता का अभिवादन कर सके। मंच पर प्रधानमंत्री को सीएम मोहन यादव ने भगवान राम के बालस्वरूप की प्रतिमा भेंट की। वहीं, सांसद वीडी शर्मा ने पीएम मोदी को अटल जी की छोटी सी मूर्ति भेंट की। मंच पर पीएम श्री मोदी ने केन और बेतवा नदी के जल कलश का प्रतीकात्मक संगम करते हुए परियोजना का शिलान्यास किया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने बुंदेली उद्बोधन से लाखों लोगों का अभिवादन किया। परंपरागत ढंग से शुरु हुए इस शिलान्यास कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद वीडी शर्मा ने प्रधानमंत्री सहित सभी अतिथियों का स्वागत किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी जब संबोधन के लिए आए तो उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार लोगों के सपनों को अपने पसीने से सींचती है। उल्लेखनीय है कि उक्त परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिलों छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा और सागर में 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और 44 लाख किसान परिवार लाभान्वित होंगे। वहीं उत्तर प्रदेश में 59 हजार हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी एवं 1.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मौजूदा सिंचाई का स्थिरीकरण किया जायेगा, जिससे उत्तर प्रदेश के महोबा, झांसी, ललितपुर एवं बांदा जिलों में सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। परियोजना से मध्यप्रदेश की 44 लाख और उत्तर प्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही फसलों के उत्पादन एवं किसानों की आय में वृद्धि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण से हरित ऊर्जा में 103 मेगावॉट योगदान के साथ रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। बेहतर जल प्रबंधन एवं औद्योगिक इकाइयों को पर्याप्त जल आपूर्ति से औद्योगिक विकास होगा और रोजगार को बढ़ावा भी मिलेगा।

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