Home डेली न्यूज़ वृद्धजनों के प्रति युवाओं का दायित्व विषय पर गल्र्स कॉलेज में संगोष्ठी

वृद्धजनों के प्रति युवाओं का दायित्व विषय पर गल्र्स कॉलेज में संगोष्ठी

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ममता के साथ-साथ वात्सल्य भी उतना ही जरूरी: लखनलाल असाटी

छतरपुर। संबंधी के प्रति जिम्मेदारी का भाव स्नेह है जिसका प्रगटीकरण ममता और वात्सल्य के रूप में होता है। संबंधी के शरीर के प्रति जिम्मेदारी का भाव ममता है तथा संबंधी के समझ के प्रति जिम्मेदारी का भाव वात्सल्य है। जब हम संबंध देख पाते हैं तब चाहे बच्चा हो, चाहे बुजुर्ग, सबके प्रति अपने दायित्व का उचित निर्वहन जरूर करते हैं। उक्त उद्गार लखनलाल असाटी ने गल्र्स पीजी कॉलेज में आयोजित वृद्धजनों के प्रति युवाओं का दायित्व विषय पर तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता के समापन अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में दिए। इस अवसर पर प्राचार्य शशिप्रभा सिंह परिहार, डॉ. शशिकांत अवस्थी एवं डॉ. नीरज निरंजन प्रमुख रूप से उपस्थित थे।भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत विषय पर संगोष्ठी कार्यक्रम के अंतर्गत गल्र्स कॉलेज में आयोजित तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपने उद्बोधन में इस बात को रेखांकित किया कि समाज में बुजुर्गो के प्रति सम्मान नहीं है और उनकी उचित देखभाल नहीं हो रही है जिस कारण वृद्धावस्था में उन्हें दुखद जीवन जीना पड़ रहा है। लखनलाल असाटी ने कहा कि मूलरूप से सारी विचार प्रक्रिया संबंध पर आधारित है जहां-जहां हम संबंध देख पाते हैं वहां-वहां हमारा आचरण निश्चित हो जाता है और हम उचित निर्वाह कर पाते हैं। संबंध के अभाव में हमारा आचरण जिम्मेदारीपूर्वक नहीं होता है। परिवार में कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत है। सम्मान की आवश्यकता परिवार के छोटे से लेकर बुजुर्ग व्यक्ति सभी की है पर अभी हमारी मान्यता यह है कि सम्मान बुजुर्गों का होना चाहिए। इसी तरह जब हम मान्यताओं और धारणाओं को अपना संस्कार बना लेते हैं तो शरीर के आधार पर दूसरे से भेद करते हैं जिस कारण खुद भी दुखी होते हैं और सामने वाले को भी दुखी करते हैं। लखनलाल असाटी ने कहा कि शरीर के अलावा भी मैं अर्थात् खुद को जानने, समझने की आवश्यकता है। प्राय: परिवार में सारा काम शरीर की जिम्मेदारी को ध्यान में रखकर ममता के ऊपर हो रहा है। वात्सल्य के रूप में समझ बढ़ाने के लिए कोई प्रयास नहंी है जिस कारण सही समझ के अभाव में व्यवहार भी गैर जिम्मेदारी का होता है। उन्होंने जीवन के अनेक उदाहरणों के माध्यम से विषय को स्पष्ट करने का प्रयास किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीरज निरंजन तथा आभार प्रदर्शन शशिकांत अवस्थी ने किया। प्रतियोगिता में स्नेहा तिवारी प्रथम, आराधना अहिरवार द्वितीय, खुशी सेन तृतीय स्थान पर रहीं। सांत्वना पुरस्कार कु. पवन यादव को मिला।

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