Home डेली न्यूज़ भक्ति वही श्रेष्ठ है जिसमें ईष्या कपट न हो: वेदांत महाराज

भक्ति वही श्रेष्ठ है जिसमें ईष्या कपट न हो: वेदांत महाराज

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कण कण में महादेव है बस मन मे भक्ति भाव होना चाहिये

महाराजपुर। नगर के कमल तलैया प्रांगण में चल रही शिव महापुराण की कथा में दिनों दिन भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है। वृंदावन धाम से पधारे आचार्य वेदांत जी महाराज के श्री मुख से शिव भक्त संगीतमय शिवमहापुराण कथा को श्रवण कर रहे हैं।नगर में चल रही शिवमहापुराण की कथा मैं आचार्य वेदांत महाराज बताते हैं कि भगवान महादेव शिव शंकर बड़े ही कृपालु और दयालु हैं जैसे शिव का नाम भोला है वैसे ही इनको भक्त भी भोला ही प्रिय लगते हैं यदि भक्ति भाव से जो कुछ भी शिव को अर्पण करता है। भोलेनाथ उसकी समस्त मनोकामनाएं पूरी करके उसके जीवन को धन्य कर देते हैं। यदि किसी व्यक्ति और भगत के मन में ईष्या या कपट है या कोई शिव भक्तों की बुराई करता है तो उसके लिए भगवान महादेव ने काल भैरव को आदेशित कर रखा है कि जो भी शिव भक्तों की बुराई करें या निंदा करें उसको दंड देना काल भैरव का काम है। कथा व्यास आचार्य वेदांत जी महाराज बताते हैं कि जब भी भगवान शिव समाधि में लीन रहते हैं तब जो भी भक्त शिवालय में आते हैं उन सभी की अर्जी को स्वीकार करना काल भैरव का ही काम होता है जैसे कि आप सभी को पता होगा कि जब भी हम 12 ज्योतिर्लिंग में से एक महाकालेश्वर उज्जैन जाते हैं तो महाकालेश्वर की पूजा अर्चना के बाद काल भैरव का पूजन जरूर करते हैं क्योंकि शिव पूजन के साथ काल भैरव की पूजा करने से ही शिव की आराधना पूरी मानी जाती है।शिव महापुराण कथा में आचार्य वेदांत महाराज द्वारा कई ऐसे उपाय बताए गये हैं जिनको व्यक्ति करे तो वह अपने जीवन को शिवमय बना सकता है और जीवन में आने वाली कठिनाइयों को समाप्त कर सुखी जीवन परिवार सहित व्यतीत कर सकता है क्योंकि भगवान भोलेनाथ सभी की मनोकामनाओं को पूरा करने वाले हैं।नगर में चल रही शिव महापुराण की इस कथा को श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कमल तलैया प्रांगण में पहुंचते हैं और शाम 6 बजे से लेकर हरि इच्छा तक चलने वाली इस शिव महापुराण की कथा का श्रवण बड़े ही भाव के साथ करते हैं। अंत में आरती के पश्चात समस्त भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।

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