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जीवन में दुख मिले चाहे सुख दोनों स्थिति में भगवान की उपस्थिति अनिवार्य है : धन्वंतरी दास जी महाराज

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संगीतमय भागवत कथा के दूसरे दिन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
छतरपुर। शहर के संस्कार वाटिका में पत्रकार जीतेन्द्र रिछारिया के आयोजन में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत के द्वितीय दिवस की कथा में श्री धाम वृंदावन से पधारे परम पूज्य श्री धन्वंतरी दास जी महाराज ने श्रीमद् भागवत का मंगलाचरण का विस्तार से वर्णन किया। भगवान के 24 अवतारों की कथा सुनाते हुए बताया धर्म की रक्षा के लिए भगवान इस धरती पर प्रकट होकर अधर्म का नाश करते हैं। माता कुंती की स्तुति का वर्णन किया और बताया जीवन में जब दुख आते हैं तभी भगवान की याद आती है इसलिए भगवान सदा सर्वदा निकट बने रहें माता कुंती ने इसी भावना के साथ भगवान से दुख मांगे, पूज्य महाराज जी ने बताया की जीवन में दुख मिले चाहे सुख मिले दोनों की स्थिति में भगवान की उपस्थिति अनिवार्य है भगवान को कभी नहीं भूलना चाहिए। पितामह भीष्म की स्तुति का वर्णन किया और बताया जीवन के अंतिम समय में भगवान का नाम भगवान का दर्शन हो जाए ऐसा प्रयास करना चाहिए जिससे हमारी मति भगवान के चरणों में लग जाए। श्री परीक्षित जी महाराज के जन्म कर्म की कथा सुनाइ श्री परीक्षित जी महाराज को श्राप लगने की कथा भी सुनाई, सुखदेव जी महाराज के आगमन पर श्रीमद् द्भागवत के दिवस की कथा का विश्राम किया। कथा में पधारे सभी श्रद्धालुओं जनों ने खूब आनंद लिया और आम जनों ने भाव विभोर होकर कथा का रसपान किया।

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