
छतरपुर। श्री कृष्णा विश्वविद्यालय में उद्धमिता विकास केन्द्र म.प्र द्वारा पंच दिवसीय प्रबन्ध विकास कार्यक्रम का आज समापन हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता एमके श्रीवास, कार्यक्रम जिला समन्वयक जिला छतरपुर रहे। विशिष्ट अतिथि विश्व विद्यालय के चेयरमैन डॉ.पुष्पेंद्र सिंह गौतम रहे। इस कार्यक्रम का आयोजन सीईडीएमएपी एवं श्री कृष्णा विश्वविद्यालय के इन्क्यूवेशन एवं इनोवेशन सेन्टर द्वारा किया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ मंचासीन अतिथियों ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। विश्वविद्यालय के उपकुलपति गिरीश त्रिपाठी ने कार्यशाला की उपयोगिता के बारे में अवगत कराते हुए कहा कि उद्यम व्यक्ति देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर उस राष्ट्र को विकास के पथ पर ले जा सकता हैं। यह हमारे लिए गौरव की बात है कि आज उद्यमिता की तर्ज पर ही भारत देश संपूर्ण विश्व में तीसरे पायदान पर अपनी उपस्थिती दर्ज कर रहा है।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एम के श्रीवास ने अपने उद्बोधन में कहा कि उद्यमिता का अर्थ एक फर्म या उद्यम शुरू करना है उद्यमिता वह है जो व्यक्ति अपने कैरियर अपने लक्ष्यों की जिम्मेदारी संभालने और उन्हें वांछित दिशा में ले जाने के लिए करते हैं। यहां कोई बॉस नही है आप शायद सोच रहे होंगे कि आप जैसे छात्रों के लिए उद्यमशीलता का क्या महत्व है? यह सच है कि पारंपरिक नौकरियां अभी भी सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करती हैं, लेकिन आज का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। नई टेक्नोलॉजी और वैश्विक परिस्थितियों के कारण नौकरी बाजार लगातार बदल रहा है। उद्यमशीलता आपको न केवल अपने भविष्य को स्वयं निर्धारित करने की स्वतंत्रता देती है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक शक्तिशाली उपकरण भी है। आप अपनी रचनात्मकता और नवाचार का उपयोग करके समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, नए उत्पादों और सेवाओं का निर्माण कर सकते हैं, और रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री कृष्णा विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ.पुष्पेंद्र सिंह गौतम ने कहा कि निश्चय ही कार्यशाला विद्यार्थियों में नई उर्जा का संचार करेगी। युवा देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं उद्यमी बनकर हम स्वयं के साथ-साथ राज्य एवं राष्ट्र का विकास करते हैं। उद्यमी की प्रमुख विशेषता चलना होती है रूकना नही क्यों कि ठहराव व्यक्ति को आगे नहीं बढऩे देता है उसकी सोच संकुचित हो जाती है। अत: हमें हमेशा गतिशील रहना चाहिए नये- हमें भीड़ का हिस्सा न बनकर रॉल मॉडल बनना है। एक सफलता मात्र से संतुष्ट नही होना है बल्कि नित नवीन पायदानों को पूर्ण करना है। उद्यमशीलता की यात्रा रोमांचक और पुरस्कृत है। यह न केवल आपके व्यक्तिगत विकास के लिए बल्कि समाज के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। तो, आगे बढ़ें, जोखिम लें, और अपने उद्यमशीलता के सपनों को साकार करें।कार्यक्रम के समन्वयक इन्क्यूवेशन एवं इनोवेशन सेन्टर के प्रभारी सुदर्शन बबेले के निर्देशन में यह कार्यशाला सफल रही। कार्यक्रम का मंचसंचालन श्रीमती सुमेधा राय ने एवं आभार सुश्री गौरी तिवारी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. राजेन्द्र चौधरी, डॉ. आशीष तिवारी, डॉ. आशीष पचौरी, शिवराज सिंह, ओंकार एवं विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राऐं उपस्थित रहे।









