
टीकमगढ़। शहर में मध्य बनी एतिहासिक नजाई मंडी के मुख्य चारों दरवाजे शहर की प्राचीन एवं एतिहासिक धरोहरों की कहानी कहते आ रहे हैं। इतना ही नहीं यहां नजाई मंडी के चारों ओर बने दरवाजों के साथ ही यहां के भवनों की सुंदरता देखते ही बनती थी। समय के साथ साथ अब यहां के दरवाजों के साथ ही इमारत को ग्रहण सा लगता जा रहा है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि समय रहते यदि प्रशासन द्वारा नजाई मंडी की सुरक्षा और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वह दिन दूर नहीं, जब यह एतिहासिक एवं प्राचीन इमारत एवं परिसर गायब होता नजर आएगा। यहां बता दें कि नजाई मंडी का एक दरवाजा तो पहले ही जमीं दोज कर दिया गया है, धीरे-धीरे शेष तीन दरवाजों पर भी लोगों की नजर बनी हुई है। नजाई मंडी की नक्काशी और बनावट देखते ही बनती है। इस मैदान एवं यहां की जर्जर होती दीवारों की सुरक्षा को लेकर भी अब सवाल उठाए जाने लगे हैं। बताया जाता है कि नजाई मंडी में मंडी बनने से पूर्व जिले भर से आने वाले किसान अपना अनाज यहीं पर बेंचा करते थे। यहां की बढ़ती संकीर्णता और आवाजाही को देखते हुए मंडी का निर्माण ढोंगा के समीप कराया गया। इसके पश्चात यहां सब्जी मंडी एवं लघु कृषकों का सामान बेंचा जाने लगा। यहां की जमीन पर भी पूंजीपतियों की नजर बनी रही और धीरे-धीरे अतिक्रमण किया जाने लगा। मंडी में सौदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार न होने से यहां की अव्यवस्थाएं भी बढऩे लगी हैं। सूत्रों की मानें तो मंडी का उत्तरी द्वारा कतिपय लोगों ने धीरे-धीरे गिरा कर अपने मकानों का निर्माण करा डाला है। यहां के उत्तरी द्वारा का निर्माण कराने के साथ ही अन्य दरवाजों का जीर्णोद्धार किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही मुख्य पूर्वी द्वार को आकर्षक एवं बेहतर बनाए जाने के साथ ही इमारत की मरम्मत किए जाने की आवश्यकता महशूस की जाती रही है। यदि प्रशासन द्वारा मंडी के रखरखाव एवं मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह शहर के मध्य बनी नजाई मंडी नष्ट होने में देर नहीं लगेगी।
मंडी में नहीं हैं महिला शौचालय-
शहर के बीचों बीच बनीं नजाई मंडी में फिलहाल कोई महिला शौंचालय तक नहीं है, जबकि यहां कई महिलाएं गांवों से सब्जी बेंचने के लिए आती है। महिलाओं का कहना है कि वह खुले में यदि जाती भी हैं, तो यहां रहने वाले लोगों से विवाद होता है। महिला सब्जी बिक्रेताओं ने नजाई मंडी में गांवों से आने वाली महिलाओं एवं सब्जी बिक्रेताओं के लिए पेयजल एवं शौचालय का इंतजाम किए जाने पर जोर दिया है।
क्या बदलेंगे शहर के सूरत-ए-हाल-
ज्ञात हो कि शहर में बीचों बीच बनी कई आकर्षक इमारतों को पहले ही नष्ट किया जा चुका है। पुरानी तहसील को तोडक़र जहां मार्केट बना दिया गया, वहीं पुराना आयुर्वेद अस्पताल जमींदोज कर यहां प्रतिमाएं लगा दी गईं। जबकि यदि इन भवनों का जीर्णोद्धार कराया होता, तो शहर की रौनक ही कुछ और होती। इसी प्रकार नजरबाग में बनी पुरानी हायर सेकेन्डरी की इमारत को भी अब तक अनदेखा किया जा रहा है। यहां बनें तोपखाना के तोड़े जाने से प्राचीन सुंदरता गायब हो गई है। अब यहां के गांधी चौराहे की अव्यवस्थाओं ने राहगीरों का निकलना मुश्किल कर दिया है। शहर की सुंदरता को लगे ग्रहण और जिम्मेदार लोगों की उदासीनता ने लोगों की परेशानियों को बढ़ाने का काम जरूर किया है। अब देखना है कि शहर के सूरत-ए-हाल बदलने दिशा में प्रशासन द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं।








