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टीकमगढ़ के माची गांव में घुसे जंगली जानवर हायना का किया गया सफल रेस्क्यू

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टीकमगढ़। सुबह से ही मांची गांव में उस समय दहशत फैल गई, जब यहां लकड़बग्घा होने की खबर फैली। गांववासियों में किसी बढ़ी घटना की आशंका घर करने लगी। लकड़बग्घा होने की सनसनी आसपास के इलाकों में फैल गई। इसी दौरान वन कर्मचारियों ने यहां लकड़बग्घा को पकडऩे के लिए रणनीति बनाकर उस पर कार्य करना शुरू कर दिया। जंगल विभाग की टीम ने रेंज आफीसर शिशुपाल अहिरवार के नेतृत्व में रेस्क्यू कर लकड़ बग्घा को कब्जे में कर लिया। जानवर के कब्जे में आते ही गांववासियों ने चैन की सांस ली। इस संबन्ध में श्री एसपी अहिरवार ने बताया कि वन विभाग के अधिकारियों ने रेस्क्यू किए गए हायना को रात में जंगल में सुरक्षित छोड़ा। लकड़बग्घा के गांव में आ जाने से गांव के निवासियों में दहशत फैली रही। रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। कहा जा रहा है कि थोड़ी चूक होने पर किसी भी समय बढ़ी घटना हो सकती थी। लोगों ने वनाधिकारियों की टीम और ग्रामीणों के सहयोग की सराहना की है। बताया गया है कि विगत दिवस 23 नवम्बर 2024 की सुबह लगभग 9 बजे एक जंगली जानवर हायना (लकड़बग्घा) जंगल से भटकर मांची गांव में एक घर में घुस गया। जिसके बाद वन अमले को सूचना मिलते ही वन विभाग के द्वारा तत्परता दिखाते हुए मांची गांव पहुंचकर हायना को रेस्क्यू के लिए सुरक्षित किया जाकर गांव वालों से सहयोग की अपील की गई। दिन भर इंतजार करने के बाद वन विभाग द्वारा 23 नवम्बर 2024 की शाम को माची गांव में मुनादी कराते हुए गांव वालों को हायना के रेस्क्यू के दौरान सुरक्षित अपने घरों में रहने को कहा गया। 23 नवम्बर 2024 की रात्रि लगभग 9.10 बजे के बीच में घर में बंद हायना को सुरक्षात्मक तरीके से जंगल में छोड़ा गया। बताया गया कि तभी वह भीड़ को देखकर और ग्रामीणों के शोर शराबा से हायना जंगल का रास्ता भटक कर वापिस गांव की तरफ आने लगा। तब मांची गांव के ग्रामीणों की मदद से पूरे वन अमले के द्वारा हायना को रेस्क्यू करके सुरक्षित अपने कब्जे में लिया गया। इसके पश्चात उसे मांची गांव से बाहर ले जाकर आलपुर नर्सरी के जंगल में रात्रि में सुरक्षित छोड़ा गया। हायना के रेस्क्यू के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित नहीं हो पाई। वन अमले की तत्परता और सूझबूझ से ग्रामीणों और हायना को सुरक्षित करते हुए सफल रेस्क्यू किया गया।

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