खजुराहो। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा संचालित आदिवर्त जनजातीय एवं लोककला राज्य संग्रहालय, खजुराहो में साप्ताहिक सांस्कृतिक श्रृंखला ‘देशजÓ के अंतर्गत रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बुंदेलखंड एवं बघेलखंड की समृद्ध लोकसंगीत परंपराओं तथा भील जनजातीय संस्कृति पर आधारित आकर्षक प्रस्तुतियाँ दी गईं। दीप प्रज्ज्वलन और आमंत्रित कलाकारों के पारंपरिक सम्मान के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम ने दर्शकों को प्रदेश की विविधतापूर्ण लोकसंस्कृति से रूबरू कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ रीवा की सुश्री दीक्षा शुक्ला के बघेली लोकगायन से हुआ। उन्होंने गणेश भजन, देवी भजन, बधाई गीत और बेलनाहाई जैसे पारंपरिक गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उनके गायन में बघेली भाषा की मिठास और धार्मिक आस्था का सुंदर समावेश देखने को मिला। इसके पश्चात झाबुआ के श्री गंगाप्रसाद डामर और उनके दल ने भील जनजाति के प्रसिद्ध ‘भगोरिया नृत्यÓ की ऊर्जावान प्रस्तुति दी। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा, हाथों में तीर-कमान और चक्रीपाली व पिरामिड जैसी नृत्य मुद्राओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संध्या की अंतिम प्रस्तुति टीकमगढ़ की सुश्री प्रियंका अहिरवार ने बुंदेली लोकगीतों के रूप में दी। उन्होंने सरस्वती वंदना, देवी भजन, कार्तिक गीत एवं दादरा प्रस्तुत कर बुंदेलखंड की सांगीतिक विविधता और भावसमृद्धि को रेखांकित किया।
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