Home डेली न्यूज़ बजट खपाने के लिए दी गई किसानों की बलि…!

बजट खपाने के लिए दी गई किसानों की बलि…!

13
0
Jeevan Ayurveda


छतरपुर। मध्य प्रदेश शासन द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने और उन्नत खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित वैल्यू चैन क्लस्टर योजना छतरपुर जिले में भ्रष्टाचार और मनमानी की भेंट चढ़ गई है। कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने केवल कागजी लक्ष्य पूर्ति और बजट को ठिकाने लगाने के लिए जिले की मिट्टी व जलवायु के प्रतिकूल ‘काली तिल’ के बीज का वितरण करवा दिया। परिणाम यह है कि खेतों में खड़ी फसल पर फल आने से पहले ही फूल झड़ रहे हैं, जिससे किसानों के सामने आर्थिक बर्बादी और कर्जदार होने का संकट खड़ा हो गया है।
कृषि विभाग के विभागीय रिकॉर्ड और स्थानीय विशेषज्ञों के अनुसार, छतरपुर जिले की जलवायु और मिट्टी काली तिल की पैदावार के लिए कतई उपयुक्त नहीं मानी जाती। यही वजह है कि बीते कई वर्षों से जिले में वितरण के लिए काली तिल की मांग कभी नहीं भेजी गई। इसके बावजूद, खरीफ वर्ष 2026 की शुरुआत में उपसंचालक कृषि डॉ. एके मिश्रा के स्तर से अचानक काली तिल का भारी-भरकम ऑर्डर जारी कर दिया गया। आरोप हैं कि वैल्यू चैन क्लस्टर के तहत शासन से मिले करोड़ों रुपये के बजट का सुनियोजित तरीके से बंदरबांट किया गया। किसानों के न चाहने पर भी जबरन इस गैर-अनुशंसित बीज को उनके सुपुर्द कर दिया गया ताकि विभागीय टारगेट कागजों पर पूरे दिखाए जा सकें। जिले के बिजावर और लवकुशनगर क्षेत्र के दर्जनों किसानों ने अपने खेतों में खड़ी बर्बाद होती फसलों को दिखाकर क्षेत्रीय कृषि कर्मचारियों व अधिकारियों से लिखित शिकायत दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि पौधों में जैसे ही फूल आ रहे हैं, वे असमय झड़कर नीचे गिर रहे हैं। जब फूल ही नहीं बचेंगे, तो फल (तिल) लगने की कोई संभावना नहीं रहेगी। खाद, बीज, जुताई और सिंचाई में हजारों रुपये प्रति एकड़ खर्च करने के बाद अब किसानों के हाथ केवल सूखी डालियां बची हैं। किसानों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की बजाय उन्हें आर्थिक तबाही झेलनी पड़ रही है। इस पूरे खेल में अब कृषि विभाग की भूमिका पर सीधे सवाल उठ रहे हैं। जब कृषि वैज्ञानिकों ने छतरपुर के लिए इस किस्म की आधिकारिक अनुशंसा ही नहीं की थी, तो इसे क्लस्टर योजना में शामिल करने की अनुमति किस स्तर से मिली?
इनका कहना
यह अत्यंत गंभीर मामला है और इसे संज्ञान में लिया गया है। किसी भी सूरत में किसानों के हितों और सरकारी बजट के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर बीज चयन, खरीदी और वितरण के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
उमाशंकर भार्गव, संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, भोपाल

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here