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यूजीसी एक्ट के विरोध में अधिवक्ता संघ का प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

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छतरपुर में अधिवक्ता संघ ने यूजीसी एक्ट और जातिगत आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। अधिवक्ताओं ने यूजीसी एक्ट लागू नहीं करने के साथ ही जातिगत आरक्षण को समाप्त कर आर्थिक आधार पर आरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग की। इसके अलावा ज्ञापन में एससी-एसटी एक्ट के मौजूदा प्रावधानों और पदोन्नति में आरक्षण को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। अधिवक्ता संघ का कहना है कि सरकारी योजनाओं और नीतियों का लाभ जाति के बजाय आर्थिक और सामाजिक स्थिति के आधार पर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए।
शुक्रवार को छतरपुर कलेक्ट्रेट परिसर में अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकत्रित हुए। यहां संघ की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा गया। ज्ञापन में अधिवक्ता संघ ने यूजीसी एक्ट को लागू नहीं किए जाने की मांग करते हुए वर्तमान आरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। संघ का कहना है कि देश में आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सके।
अधिवक्ता संघ की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर, गरीब, दिव्यांग और असहाय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए।संघ का दावा है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कई बार अपेक्षित अवसर नहीं मिल पाते। इसी को लेकर अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति से आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने और इसे आर्थिक आधार से जोडऩे की मांग की है।
ज्ञापन में सरकारी सेवाओं में पदोन्नति के दौरान दिए जाने वाले जातिगत आरक्षण का मुद्दा भी उठाया गया। अधिवक्ता संघ ने मांग की कि पदोन्नति में जातिगत आरक्षण की व्यवस्था समाप्त हो और कर्मचारियों की पदोन्नति उनकी योग्यता, वरिष्ठता और कार्यक्षमता के आधार पर की जाए।इसके साथ ही चिकित्सा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर भी संघ ने अपनी बात रखी है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इन क्षेत्रों में योग्यता को प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए, जिससे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सके।
अधिवक्ता संघ ने ज्ञापन में एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई और इसे समाप्त किए जाने की मांग की। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कानून और सरकारी व्यवस्थाएं ऐसी होनी चाहिए जिनसे समाज के सभी वर्गों को समान न्याय मिले और किसी भी वर्ग में भेदभाव या असंतोष की स्थिति पैदा न हो।हालांकि एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण से जुड़े विषय संवैधानिक एवं कानूनी व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। अधिवक्ता संघ ने इन्हीं व्यवस्थाओं में बदलाव की अपनी मांग राष्ट्रपति के समक्ष ज्ञापन के माध्यम से रखी है।
अधिवक्ताओं ने ज्ञापन में सामाजिक भाईचारा और समानता बनाए रखने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति किसी भी जाति या वर्ग से हो सकता है, इसलिए सरकारी सहायता और अवसर तय करते समय उसकी आर्थिक स्थिति को प्राथमिक आधार बनाया जाना चाहिए। संघ ने राष्ट्रपति से मांग की है कि जातिगत आधार पर चल रही आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों के हितों को ध्यान में रखकर नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएं।
कुल मिलाकर छतरपुर अधिवक्ता संघ ने यूजीसी एक्ट, जातिगत आरक्षण, पदोन्नति में आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट सहित कई मुद्दों को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें केंद्र स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की है। अब इन मांगों पर शासन और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह देखना होगा। फिलहाल अधिवक्ता संघ ने स्पष्ट किया है कि वह जातिगत आधार के बजाय आर्थिक आधार पर अवसर और आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था का समर्थन करता है।

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