छतरपुर। जिला अस्पताल छतरपुर अब न केवल अपने जिले बल्कि पड़ोसी जिलों टीकमगढ़, पन्ना और यहां तक कि उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के मरीजों के लिए भी एक विश्वसनीय स्वास्थ्य केंद्र बन चुका है। अस्पताल में विशेषज्ञ उपचार और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच सुविधाओं पर बढ़ता भरोसा देखने को मिल रहा है, जहां प्रतिदिन 50 से 70 अल्ट्रासाउंड जांचें की जा रही हैं। इस बढ़ती मरीज संख्या से अस्पताल में लगातार भीड़ बनी रहती है, लेकिन डॉक्टरों और संसाधनों की कमी इसे चुनौतीपूर्ण बना रही है।अस्पताल में फिलहाल तीन अल्ट्रासाउंड मशीनें उपलब्ध हैं और मात्र दो डॉक्टर ही तैनात हैं। डॉ. सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि हाल ही में एक दिन में कुल 53 अल्ट्रासाउंड किए गए, जिनमें 50 नियमित ओपीडी के मरीजों के और 3 इमरजेंसी के थे। डॉक्टरों की सीमित संख्या के कारण सभी मरीजों को समय पर जांच मिलना मुश्किल हो रहा है। कई मरीजों को मजबूरन निजी सोनोग्राफी केंद्रों का रुख करना पड़ता है, जहां खर्च अधिक होता है।विशेष रूप से न्यूरोलॉजी और अन्य विशेषज्ञ सेवाओं की कमी आसपास के जिलों में होने के कारण मरीज दूर-दराज से यहां पहुंच रहे हैं। जहां एक ओर यह अस्पताल पर जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों, मशीनों और अन्य संसाधनों की कमी साफ नजर आ रही है।









