छतरपुर। वरिष्ठ नागरिकों के बीच अंतर-पीढ़ीगत जुड़ाव, कल्याण और खुशहाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को महलों की समीप पुरानी तहसील परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों और बुजुर्गों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि पाश्चात्य सभ्यता के बढ़ते प्रभाव के कारण संयुक्त परिवारों की परंपरा कमजोर हो रही है और एकल परिवारों के चलन से अनेक बुजुर्ग अकेलेपन व तनाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा देश के बड़े शहरों में इस तरह के कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है, जिन्हें अगले चरण में राज्य सरकारों के सहयोग से निचले स्तर तक ले जाया जाएगा।उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में छतरपुर के विभिन्न विद्यालयों के बच्चों के साथ उनके दादा-दादी को आमंत्रित किया गया था। बुजुर्गों ने परिवार, सामाजिक संरचना और जीवन अनुभवों को साझा किया, जिससे बच्चों को सीखने और समझने का अवसर मिला। मंत्री ने सुझाव दिया कि विद्यालयों में वर्ष में एक दिन दादा-दादी दिवस के रूप में मनाया जाए, ताकि बच्चे बिना बैग के अपने दादा-दादी के साथ स्कूल आएं और उन्हें विद्यालय की गतिविधियों से अवगत कराएं। कार्यक्रम का आयोजन छतरपुर की पुरानी तहसील परिसर में किया गया, जहां बड़ी संख्या में नागरिक, वरिष्ठजन और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने पीढिय़ों के बीच संवाद और पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश दिया।










