छतरपुर। जिले की एक सहकारी समिति के सदस्यों ने आज कलेक्टर की जनसुनवाई में उपस्थित होकर अपनी आजीविका के एकमात्र सहारे को पुनर्जीवित करने की मांग की। पीडि़त मछुआरों ने समिति के भंग होने पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें चुनाव कराने के नाम पर गुमराह किया और उनके त्यागपत्रों पर हस्ताक्षर करा लिए। बाद में इन्हीं हस्ताक्षरों का उपयोग दुर्भावनापूर्वक समिति को परिसमापन (लिक्विडेशन) में डालने के लिए किया गया, जिससे सैकड़ों गरीब मछुआरों की रोज़ी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।भेलनपुरवा स्थित छन्ना सागर मत्स्य उद्योग एवं सिंघाड़ी उद्योग सहकारी समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि राजेश रैकवार नामक व्यक्ति द्वारा दुर्भावनापूर्वक चाल चलते हुए समिति को 31 मार्च 2020 को परिसमापन में डाल दिया गया। मछुआरों ने बताया कि उनकी समिति का पंजीयन क्रमांक 483 दिनांक 10-09-1984 से मान्य है और वे वर्षों से इसी के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे थे। समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि चुनाव कराने के नाम पर उन्हें गुमराह किया गया और उनके त्यागपत्रों पर हस्ताक्षर करा लिए गए, जिसका उपयोग बाद में समिति को भंग कराने के लिए किया गया। गरीब मछुआरों की रोज़ी-रोटी पर बड़ा संकट खड़ा होने के कारण, पीडि़त महिलाओं ने भी जनसुनवाई में उपस्थित होकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि वे पिछले तीन जनसुनवाई में अपनी समस्या लेकर आईं, लेकिन हर बार कार्रवाई न होने के कारण मायूस होकर लौटना पड़ा। समिति के सदस्यों ने कलेक्टर से आग्रह किया कि उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा रही यह समिति पुन: संचालित की जाए, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मानपूर्वक कर सकें। लगातार तीन जनसुनवाई से मायूस लौट रहे पीडि़तों ने प्रशासन से शीघ्र समाधान की उम्मीद जताई है।










