
छतरपुर। महाराजा छत्रसाल की ऐतिहासिक नगरी छतरपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का संघ शिक्षा वर्ग बीते 15 दिनों से चल रहा था, जिसका समापन समारोह रविवार शाम सरस्वती शिशु मंदिर, सिंचाई कॉलोनी, छतरपुर में संपन्न हुआ।
महाकौशल प्रांत के 34 में से 32 जिलों के प्रतिनिधित्व के साथ कुल 181 शिक्षार्थियों ने इस प्रशिक्षण वर्ग में भाग लिया। प्रशिक्षण में 28 शिक्षक, 14 संचालन टोली सदस्य, विभिन्न जिलों से आए पालक बंधु एवं लगभग 63 कार्यकर्ता अपनी सेवा में निरंतर जुटे रहे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता शंकर लाल अहिरवार, मुख्य वक्ता के रूप में सह क्षेत्र कार्यवाह (मध्य क्षेत्र) हेमंत मुक्तिबोध, वर्ग के सर्वाधिकारी नागेंद्र सिंह एवं जिला संघचालक विनोद कुमार दुबे मंचासीन रहे। समारोह में शिक्षार्थियों ने शारीरिक एवं बौद्धिक अभ्यासों जैसे सामूहिक खेल, गण समता, दंड संचालन, नियुद्ध, पद विन्यास और यष्टि आदि का प्रभावशाली प्रदर्शन कर दर्शकों को प्रभावित किया।
मुख्य अतिथि शंकर लाल अहिरवार ने कहा, संघ का यह 15 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग विद्यार्थियों के जीवन में अनुशासन, आत्मविकास और राष्ट्रभक्ति के बीज बोता है। यदि देश के नागरिक इस दिनचर्या को अपनाएं तो भारत निश्चित ही विश्वगुरु बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल और आधुनिकता के चलते परिवार व समाज से दूरी बढ़ी है, ऐसे में संघ जैसे संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
मुख्य वक्ता हेमंत मुक्तिबोध ने अपने उद्बोधन में कहा कि संघ अपने शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ रहा है और इसका मूल मंत्र व्यक्ति निर्माण, कार्यकर्ता निर्माण है। शाखाओं के माध्यम से जो प्रशिक्षण प्रतिदिन होता है, उसी का विस्तार इस वर्ग के रूप में होता है। उन्होंने संघ के पांच परिवर्तन – कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता और स्व जागरण – को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वयंसेवक गांव-गांव जाकर इन विषयों पर जन जागरण अभियान चला रहे हैं। कार्यक्रम में आए अतिथियों ने प्रशिक्षार्थियों की अनुशासनबद्धता, ऊर्जा और सेवा भावना की सराहना करते हुए इसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम बताया।








