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नौनिहालों का बिलखता बचपन, भूले खेल, हाथों में थामें पउआ, नशा की फैली जहर बेल अवैध शराब बिक्री से बेखबर प्रशासन, चूल्हे पड़े ठंडे, गायब हुआ राशन

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टीकमगढ़। दूध मिले, न मिले, लेकिन शराब न मिले, ऐसा हो नहीं सकता। गांव-गांव और गली-गली हाथों में पउआ थामें लोग और नौनिहाल नजर आ जाएंगे। अवैध शराब की यह जहर बेल दिनों दिन बढ़ती जा रही है। चंद रूपयों की खातिर अधिकारी और शासन के नुमांइदे इन समस्याओं को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उनके हाथों में शराब की बोतलें और पउआ आसानी से दिखाई देने लगे हैं। नशा की लत ने लोगों के घरों के चूल्हे ठंडे कर दिए हैं और राशन के लिए परिवार तरसने लगे हैं। सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। कमीशन और भ्रष्टाचार ने जनजीवन को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। कलारियों पर बढ़ती भीड़ और दूध की गायब होती दुकानें लोगों के लिए चिन्ता का विषय बना हुआ है। शराब बंदी की आवाज उठाने वाले चेहरे ही राजनीति से किस तरह गायब कर दिए जाते हैं, इसका उदाहरण बुंदेलखंड में लोग देख चुके हैं। अब यह मुद्दा सपना बनकर रह गया है। शासन महिलाओं के सम्मान एवं सुरक्षा के बढ़े-बढ़े दावे करता आ रहा है, और यहां शहर के हालात यह हैं कि यहां अधिकारी महिलाओं की आवाज सुनने से ही परहेज करते आ रहे हैं। महिलाओं को न्याय देना तो दूर, उनकी आवाज सुनने के लिए भी उनके पास समय नहीं है। यहां संयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को अपनी बात सुनाने के लिए ही घंटों इंतजार करना पड़ा। अवैध शराब बेंचने वाला आबकारी विभाग खुद ही इस कदर मद में डूबा है, कि वह अपने कर्तव्यों से बेखबर होकर ठेकेदारों के इर्द-गिर्द ही नजर आते रहे हैं। ठेकेदारों के इशारों पर कार्रवाई की औपचारिकताएं पूरी करने वाला यह विभाग नुमाइशी बन कर रह गया है। इनकी कमाई का अंदाजा लगा पाना आसान काम नहीं है। यदि देखा जाए तो नगरीय इलाके में ही अवैध शराब के इतने ठिकाने हैं कि गिनती कर पाना नामुमकिन है। इसमें गौर करने वाली बात यह है कि अवैध शराब की बिक्री मलिन बस्तियों में ही होती है, जहां गरीब परिवार निवास करते हैं। गरीब परिवारों के बच्चों में यह लत आसानी से लगा दी जाती है। आज हुए प्रदर्शन से एक बात तो स्पष्ट है कि महिलाएं नशा और शराब से खुश नहीं हैं। अब तक कई गांवों में अवैध शराब बेंचने वालों से ग्रामीणों का विवाद होता रहा है। इसको लेकर कई वीडियो वायरल भी हो चुके हैं। अफसरों पर से भरोसा उठने के पीछे के कारणों का पता लगाना भी जरूरी जान पड़ता है। बताया गया है कि कुछ दिन पहले ही अवैध शराब बिक्री को लेकर महिलाएं देर रात तक कोतवाली में भी जमा रहीं थीं, लेकिन लगता है कि वहां भी उन्हें मायूसी ही हाथ लगी, जिस कारण से उन्हें पुलिस कप्तान एवं कलेक्टर का दरवाजा खटखटाना पड़ा। बताया गया है कि शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत महाराजपुरा की महिलाओं ने शुक्रवार को एसपी दफ्तर में प्रदर्शन किया। उन्होंने हाथों में बैनर पोस्टर लेकर गांव में हो रहे अवैध शराब के विक्रय पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। महिलाओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बताया गया है कि महाराजपुरा गांव में 2 दिन पहले मंगलवार रात अवैध शराब के विक्रय को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया था। दोनों पक्षों के लोग मामले की शिकायत लेकर कोतवाली थाने पहुंचे थे। एक पक्ष के लोगों ने महिला पर अवैध शराब बेचने के आरोप लगाए थे। जबकि दूसरे पक्ष की महिला ने लोगों पर मारपीट करने की शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों पक्षों की शिकायत पर पुलिस ने जांच के बाद मामला दर्ज करने की बात कही थी। कोतवाली थाना प्रभारी पंकज शर्मा ने बताया कि अवैध शराब की जांच के लिए दिलीप बाई के घर छापामार कार्रवाई की गई थी। हालांकि उसके घर में ताला लगा मिला था। आज गांव की महिलाएं एक बार फि र अवैध शराब विक्रय के विरोध में एसपी दफ्तर पहुंच गई। महिलाओं ने गांव में हो रहे अवैध शराब के विक्रय पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है। गांव के लोगों की मानें तो गांव में कई घरों में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से किया जा रहा है। शाम होते ही शहर से एक किलो दूर यह गांव शराब बिक्री का अड्डा बनता नजर आने लगता है।
कलेक्ट्रेट कार्यालय में की नारेबाजी एसपी दफ्तर के बाद महिलाएं कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची। उन्होंने मुख्य गेट पर खड़े होकर जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान गांव के लोग कलेक्टर को नीचे बुलाने की मांग पर अड़ गए। देहात थाना प्रभारी रवि गुप्ता ने दो लोगों को कलेक्टर चेंबर में मुलाकात के लिए पहुंचाने की बात कहीए लेकिन गांव के लोग नहीं माने। इस दौरान काफ़ी देर तक गहमा गहमी का माहौल रहा। कलेक्टर अवधेश शर्मा ने मामले की जांच के निर्देश दिए। कहा जा रहा है कि जिले में पीने वाले कर्मचारियों की भी कमी नहीं है, जिनकी अपराधियों से सांठगांठ चली आ रही है, जिस कारण उनके हौसले बुलंद बने हुए हैं। अब देखना है कि प्रशासन अवैध शराब बिक्री के मामले को कितनी गंभीरता से लेता है।

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