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व्रत से वृत्ति और वृत्ति से व्यक्ति का परिवर्तन होता है: बीके रमा

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छतरपुर। जब हम व्रत रहते हैं तो हमारा पूरा ध्यान प्रभु आराधना पर रहे। व्रत अर्थात दृढ़ता तो यह जो सावन का महीना चल रहा है इसमें हम जो भी सोमवार व्रत रहें उसमें हम दृढ़ संकल्प करें कि हमें एक-एक बुराई का व्रत लेना है एक दिन व्रत लें परचिंतन नहीं करना है, किसी दिन व्रत ले किसी से ईष्र्या नहीं करना है और इस प्रकार के व्रत लेने से हमारे व्यवहार में हमारे कर्म में परिवर्तन आएगा क्योंकि व्रत से वृत्ति और वृत्ति से प्रकृति और व्यक्ति दोनों में परिवर्तन आता है। हमारे मन के संकल्पों से ही वातावरण का निर्माण होता है इसलिए हमें सात्विक वातावरण बनाने के लिए बुराइयों का व्रत लेना बहुत जरूरी है।
उक्त उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय किशोर सागर में द्वादश ज्योर्तिलिंगम के दर्शन करने आईं गहोई समाज की सभी महिलाएं एवं अन्य श्रद्धालुओं के समक्ष बीके रमा ने व्यक्त किए। बीके रीना ने सभी को परमात्मा शिव और उनके कर्तव्यों के बारे में बताया तत्पश्चात सभी ने मिलकर 12 ज्योर्तिलिंगम की आरती की।
इस अवसर पर गहोई समाज महिला मंडल अध्यक्ष मंजू बिलैया, उपाध्यक्ष रश्मि रूसिया, कोषाध्यक्ष प्रिया रावत, सचिव कल्पना रावत उपस्थित रहीं। झांकी के दर्शन करने आईं सखी महिला भजन मंडली द्वारा ढोलक की थाप और झांझ मंजीरे की धुन पर बहुत सुंदर भजन गाए गए। सभी दर्शनार्थियों ने एक ही स्थान पर द्वादश ज्योर्तिलिंगम के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

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