
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कपिल खुराना ने बताए बचाव के तरीके
छतरपुर। होली पर रंगों की मस्ती और हवा में उड़ता गुलाल न हो तो यह त्यौहार फीका सा लगता है, लेकिन रंग लगाते वक्त हमें सावधान रहने की भी जरूरत है। बाजार में बिकने वाले केमिकल वाले रंगों से हमारी त्वचा के साथ आंखों को भी नुकसान होता है, ऐसे में हमें आंखों का बचाव करना चाहिए। इस हेतु छतरपुर के जाने-माने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कपिल खुराना ने लोगों को केमिकल वाले रंगों से आंखों और त्वचा के बचाव हेतु कुछ उपाय बताए हैं। नेत्र रोग विशेष डॉ. कपिल खुराना ने जिलेवासियों को होली की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि होली पर्व के उत्साह में हमें अपनी त्वचा और आंखों की देखभाल के साथ समझौता नहीं करना चाहिए। डॉ. खुराना के अनुसार सर्वप्रथम तो हमें होली खेलते वक्त केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग करने से बचना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि होली में हम हर्बल (प्राकृतिक) रंगों का प्रयोग करें। इसके अलावा जब भी हम होली खेलने के लिए निकलें तो चश्मा अवश्य लगाना चाहिए, इससे हमारी आंखें काफी हद तक सुरक्षित रहती हैं। इसके साथ ही चेहरे और आंखों के चारों ओर नारियल का तेल अथवा कोल्ड क्रीम लगानी चाहिए, इससे आंखें सुरक्षित रहती हैं तथा चेहरे पर जलन आदि नहीं होती है। डॉ. खुराना ने सलाह दी है कि जो लोग कॉन्टैक्ट लैंस का इस्तेमाल करते हैं उन्हें होली खेलने के दौरान लैंस निकाल देना चाहिए क्योंकि लैंस और आंखों की पुतली के बीच जब रंग फंस जाता है तो यह हमारी आंखों के लिए बेहद नुकसानदायक होता है। उन्होंने कहा कि हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि पिचकारी आदि से सीधे चेहरे पर रंग न लगे। डॉ. खुराना ने बताया कि यदि होली खेलते वक्त हमारी आंखों में रंग चला जाए तो ऐसे में हमें घबरा कर आंख को रगडऩे की बजाय धैर्य पूर्वक आंखों को साफ ठंडे धारयुक्त पानी से आंखों को धोना चाहिए और चिकित्सक से परामर्श लेकर ड्रॉप डालनी चाहिए। डॉ. खुराना ने जिलेवासियों से सावधानीपूर्वक होली का त्यौहार मनाने की अपील की है।








