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25 किलो के नगाड़े को बजाकर दी गई अवधी गायन की प्रस्तुति

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लोकरंजन के समापन दिवस पर आज होंगी राजस्थान की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
खजुराहो। मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन, छतरपुर, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर के सहयोग से  खजुराहो नृत्य समारोह परिसर में 20 से 26 फरवरी तक प्रतिदिन शाम 5 बजे से पारंपरिक कलाओं के राष्ट्रीय समारोह लोकरंजन का आयोजन किया गया है, जिसके पांचवे दिन महाराष्ट्र का सोंगी मुखौटा, आंध्रप्रदेश का गुसाड़ी एवं रामरथ पांडेय एवं साथी, रायबरेली द्वारा अवधी फाग गायन की प्रस्तुति दी गई।
समारोह की शुरुआत रामरथ पांडेय एवं साथी, रायबरेली द्वारा अवधी फाग गायन से की गई। उन्होंने महारानी कय मोतिन मांग भरी, सखियाँ श्याम बिना बृज सूना, काउन हरे मोरी पीरा सजन बिन, फागुनवा बीता जाय सोनरवा पायल हमरी न, इनमा कौन राधिका रानी, चंदन बिरवा, चंद बिरवा गोरी तोरे अंगना चंदन बिरबा, जैसे कई अवधी गीतों की प्रस्तुति दी।
प्रस्तुति के दौरान 4 फीट ऊंचे और 25 किलो के नगाड़े का प्रयोग किया गया। यह नगाड़े पूर्व काल से प्रयोग किये जाते रहे हैं। पूर्व काल में युद्ध में हिस्सा ले रहे सैनिकों को जगाने और सतर्क करने के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। अगले क्रम में सौंगी मुखौटा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। सौंगी मुखौटा नृत्य महाराष्ट्र और गुजरात के बीच सीमांत गाँवों में जो नासिक से लगभग 40 कि.मी. दूर फैले हैं, में निवास करने वाले जनजातियों का मूल नृत्य है। यह अत्यन्त आकर्षक रंग-बिरंगी वेशभूषा और हाथ में रंगीन डंडे लेकर प्रस्तुत किया जाता है। नर्तक मुर्गे के पंखों की कलंगी पहिने रहता है। यह नृत्य उनके देवता नृसिंह बेताल और काल भैरव के लिए प्रस्तुत किया जाता है। चैत्रमास से फाल्गुन तक इस नृत्य के आयोजन लगातार चलते रहते हैं। पूजा और अनुष्ठान के अवसर के अलावा बाद में यह नृत्य विशेष आमंत्रण पर विवाह के अवसर पर, बकरे की बलि के साथ, दुरात्मा के प्रभाव को दूर करने ईष्ट देव के समक्ष किया जाता है। यह नृत्य आठ दिन चलता है और अंतिम दिन नृत्य का आयोजन देवता की पूजा के साथ होता है। अगले क्रम में आंध्रप्रदेश के गुसाड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। गुसाड़ी नृत्य आंध्रप्रदेश में गोंड जनजाति के द्वारा किया जाता है। इनके द्वारा मनाये जाने वाले उत्सवों में इनकी संस्कृति की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है। पर्वों एवं किसी विशेष अवसर पर महत्व है। यह नृत्य दशहरे के बाद आरम्भ होता है तथा दीपावली में समाप्त होता है। गुसाड़ी एक प्रकार का परिधान है, जिसे गाँव के कुछ युवाओं द्वारा धार्मिक एवं सैद्धांतिक रूप से अपने गुरु के राज्याभिषेक पर पन्द्रह दिनों तक धारण किया जाता है। समारोह में आज 26 फरवरी को सायं 5 बजे राजस्थान का मांगणियार गायन, घूमर, करी, भवई एवं कालबेलिया, आंध्रप्रदेश का गुसाड़ी एवं महाराष्ट्र के सौंगी मुखौटा नृत्य की प्रस्तुति दी जायेगी। कार्यक्रम में आप सादर आमंत्रित हैं एवं प्रवेश निशुल्क है।

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