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मंदिर नही, अपनी मां के घर पैदल जाकर तोड़ा व्रत

छतरपुर। यह कहना गलत नहीं होगा कि शासकीय बीएड कॉलेज छतरपुर में पदस्थ लिपिक विपिन दीक्षित अलग विचारधारा के व्यक्ति है जिसकी झलक नवदुर्गा की नवमी तिथि को देखने को मिली है। जहां लोग अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने पैदल यात्रा करके विभिन्न देवी देवताओं के मंदिरों में जाते है, वहीं विपिन दीक्षित ने एक नया उदाहरण समाज में स्थापित किया है।
विपिन दीक्षित ने नवदुर्गा पर्व में व्रत का पालन कर, नवमी तिथि को अपने छतरपुर के निवास से अपनी माताजी के नौगांव निवास के लिए पैदल यात्रा कर उनके चरण छूकर अपने व्रत को तोड़ा। विपिन दीक्षित भले ही लिपिक के पद पर आसीन हो लेकिन उनकी वृहद सोच समाज के लिए प्रेरणाश्रोत है।
विपिन दीक्षित गणेश जी की कहानी बताकर कहते है कि दुनिया के सभी देवी देवता सबके माता पिता में बसते है। अपनी माता पार्वती और पिता शंकर जी की परिक्रमा करके जहां गणेश जी को पूरे संसार की परिक्रमा का फल मिला, तो मुझे मां दुर्गा की भक्ति का फल अपनी मां के प्रति समर्पित होने से कैसे नही मिलेगा। ईश्वर के प्रति भक्ति का भाव होना भी आवश्यक है लेकिन उसी ईश्वर ने माता पिता को अपना रूप कहा है, समाज को विश्लेषण करना चाहिए कि वह वास्तव में अपने माता पिता के लिए ईश्वर की तरह समर्पित है या नहीं। मां दुर्गा ऐसे बालको को शक्ति और बुद्धि दे जो अपने माता पिता के लिए समर्पित भाव रखते है।

का नवरात्रि में अनूठा संदेश

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मंदिर नही, अपनी मां के घर पैदल जाकर तोड़ा व्रत1

छतरपुर। यह कहना गलत नहीं होगा कि शासकीय बीएड कॉलेज छतरपुर में पदस्थ लिपिक विपिन दीक्षित अलग विचारधारा के व्यक्ति है जिसकी झलक नवदुर्गा की नवमी तिथि को देखने को मिली है। जहां लोग अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने पैदल यात्रा करके विभिन्न देवी देवताओं के मंदिरों में जाते है, वहीं विपिन दीक्षित ने एक नया उदाहरण समाज में स्थापित किया है।विपिन दीक्षित ने नवदुर्गा पर्व में व्रत का पालन कर, नवमी तिथि को अपने छतरपुर के निवास से अपनी माताजी के नौगांव निवास के लिए पैदल यात्रा कर उनके चरण छूकर अपने व्रत को तोड़ा। विपिन दीक्षित भले ही लिपिक के पद पर आसीन हो लेकिन उनकी वृहद सोच समाज के लिए प्रेरणाश्रोत है।विपिन दीक्षित गणेश जी की कहानी बताकर कहते है कि दुनिया के सभी देवी देवता सबके माता पिता में बसते है। अपनी माता पार्वती और पिता शंकर जी की परिक्रमा करके जहां गणेश जी को पूरे संसार की परिक्रमा का फल मिला, तो मुझे मां दुर्गा की भक्ति का फल अपनी मां के प्रति समर्पित होने से कैसे नही मिलेगा। ईश्वर के प्रति भक्ति का भाव होना भी आवश्यक है लेकिन उसी ईश्वर ने माता पिता को अपना रूप कहा है, समाज को विश्लेषण करना चाहिए कि वह वास्तव में अपने माता पिता के लिए ईश्वर की तरह समर्पित है या नहीं। मां दुर्गा ऐसे बालको को शक्ति और बुद्धि दे जो अपने माता पिता के लिए समर्पित भाव रखते है।

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