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पड़ोसी से जलन, घर के झगड़े, मोबाइल का अधिक उपयोग

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मानसिक विकारों को जन्म देता है: अनूप द्विवेदी,, मानसिक रोग चिकित्सक ने दिए जरूरी प्रश्नों के उत्तर

छतरपुर। भागदौड़ भरी इस जिंदगी में तेजी से मानसिक रोगियों की संख्या भी बढ़ रही है। अत्यधिक कामयाबी पाने का नशा, तनावपूर्ण जीवनशैली, बिगड़ता स्वास्थ्य और ईष्र्या व मोबाइल का अधिक उपयोग मानसिक रोगों का खतरा बढ़ा देता है। यह बात झांसी के जाने-माने मानसिक रोग चिकित्सक अनूप द्विवेदी ने एक साक्षात्कार के दौरान कही। श्री द्विवेदी हर माह के पहले और तीसरे रविवार को छतरपुर में अपनी सेवाएं देते हैं। पढि़ए उनसे किए गए सवाल-जवाब-प्र. मानसिक रोगों का खतरा किसको ज्यादा रहता है?उ. यह दो तरह से होता है, कई बार यह अनुवांशिक होता है। यदि परिवार में पहले किसी को मानसिक रोग रहा है तो उसे आने वाली पीढिय़ों में भी इसका खतरा रहता है लेकिन ज्यादातर रोगी वर्तमान जीवनशैली के कारण इसके शिकार बन जाते हैं।प्र. युवाओं में मानसिक विकारों का खतरा क्यों बढ़ रहा है?उ. विद्यार्थी जीवन में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, कामयाब होने का दबाव विद्यार्थियों को मानसिक रूप से बीमार बनाता है। युवा अवस्था में घरेलू झगड़े, पैसा कमाने या सफल होने का अत्यधिक दबाव, नशा और कुसंगति के कारण इसका खतरा बढ़ जाता है।प्र. कैसे पता चलता है कि कोई व्यक्ति मानसिक रोगी हो चुका है?उ. इसके कुछ लक्षण दिखने लगते हैं, हमेशा उदास ही रहना, तनाव में रहना, लगातार क्रोध करना, उत्तेजित हरकतें करना, नींद न आना, चिढ़चिढ़ाना, शक करना, भ्रमपूर्ण बातें करना, डिप्रेशन के सामान्य लक्षण हैं। इन्हें पहचानकर इलाज किया जाता है।प्र. आजकल मोबाइल का अधिक उपयोग हो रहा है क्या इसका भी प्रभाव दिमाग पर पड़ता है?उ. बिल्कुल, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग शरीर के लिए खतरनाक है, यदि देर रात तक मोबाइल का उपयोग किया जाता है तो इसका बुरा असर हमारी नींद पर पड़ता है। इतना ही नहीं कई बार शरीर में अत्यधिक मोबाइल उपयोग के कारण अव्यवस्थित जीवनशैली के चलते हार्मोनल बदलाव आ जाते हैं जिसके चलते मानसिक रोगों का खतरा बढ़ जाता है।प्र. मानसिक रूप से स्वस्थ्य कैसे रहें?उ. सूर्योदय के पहले जागना, नियमित कसरत करना, कलात्मक गतिविधियों से जुडऩा आपको दिमागी रूप से स्वस्थ्य रखता है। इसके साथ ही प्रसन्नचित्त रहने के लिए परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना भी एक अच्छा कदम है। यदि आप मानसिक रूप से परेशान हैं तो इसका इलाज कराना चाहिए।प्र. मानसिक रोगियों का इलाज कैसे होता है?उ. वर्तमान में मेडिकल साइंस ने काफी तरक्की की है। पहले लोग डिप्रेशन के मरीज को ऊपरी चक्कर मानकर छोड़ देते थे लेकिन अब 6 माह में ही इसका इलाज हो जाता है। मरीज को प्रतिदिन एक या दो दवाएं खिलाईं जाती हैं, उनकी सकारात्मक काउंसिलिंग की जाती है। जीवनशैली को सुधारा जाता है जिससे वे पुन: स्वस्थ्य हो जाते हैं।

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