घेराव के दौरान युवा शिवसेना जिलाध्यक्ष नीतेश तिवारी ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भवन निर्माण स्वीकृति, बोरिंग सफाई की रिपोर्ट, सड़क-नाली निर्माण और तालाबों के सौंदर्यीकरण के नाम पर खुलेआम कमीशनखोरी चल रही है। उन्होंने दो-टूक चेतावनी दी कि जनता की गाढ़ी कमाई से वसूले जा रहे टैक्स के पैसों का दुरुपयोग अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि नगर पालिका ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया और कमीशनखोरी पर लगाम नहीं लगाई, तो शिवसैनिक ईंट से ईंट बजाने से पीछे नहीं हटेंगे।
शिवसेना प्रमुख मुन्ना तिवारी की मौजूदगी में नगर पालिका प्रशासन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई कि शहर के प्राचीन व ऐतिहासिक तालाबों से एक माह के भीतर अतिक्रमण हटाकर उनकी गहरी सफाई कराई जाए और उन्हें पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किया जाए। इसके साथ ही घटिया निर्माण के चलते एक महीने में उखड़ रहीं सड़कों और खुली नालियों की मरम्मत की मांग रखी गई। शहर में डेंगू, टायफाइड और मलेरिया जैसी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सभी नालियों की तत्काल सफाई कराकर उन्हें ढंकने और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहनों को नियमित रूप से हर घर भेजने की बात कही गई। ज्ञापन में नगर पालिका के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की गई है, जिससे यह सार्वजनिक हो सके कि शहर को कितना बजट मिला और वह कहां खर्च हुआ। इसके अलावा, भेदभावपूर्ण अतिक्रमण मुहिम पर रोक लगाने, गरीब ठेले-सब्जी वालों से उड़नदस्ते द्वारा की जा रही कथित अवैध वसूली पर अंकुश लगाने, रिहायशी इलाकों से अवैध मांस की दुकानों को हटाने और सड़कों पर आवारा घूम रहे मवेशियों को कांजी हाउस भेजने की मांग की गई। कार्यकर्ताओं ने विगत पांच वर्षों में नगर पालिका द्वारा कराए गए सभी विकास कार्यों की निष्पक्ष एसआईटी (SIT) गठित कर जांच कराने की मांग रखी। प्रदर्शन और हंगामे के बाद नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ज्ञापन प्राप्त किया और सभी प्रमुख मांगों पर आगामी 15 दिनों के भीतर यथोचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। युवा शिवसेना ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समयसीमा में धरातल पर सुधार नजर नहीं आया, तो पूरे शहर में वृहद स्तर पर जन-आंदोलन छेड़ा जाएगा।









