छतरपुर। जिले के शासकीय कर्मचारियों में सकारात्मक बढ़ाने के लिए कलेक्टर पार्थ जैसवाल और सीईओ जिला पंचायत नम: शिवाय अरजरिया के मार्गदर्शन में आयोजित अल्पविराम के पांचवे शिविर के दूसरे दिन संपर्क सुधार और दिशा सत्र के माध्यम से जिला संपर्क व्यक्ति लखनलाल असाटी ने कहा कि खुद का खुद से संपर्क होना बहुत जरूरी है, अभी हम इंद्रियों को ही सब कुछ माने हैं जो कि मात्र सूचना का स्रोत हैं। इंद्रियों के नजदीक मन चंचलता का प्रतीक है, बुद्धि विकल्प उपलब्ध कराती है जबकि विवेक सत्य की ओर स्पष्ट रूप से इंगित करता है। किसी भी काम को जब हम विचार पूर्वक करते हैं कुछ समय देते हैं सोचते – समझते हैं तब विवेक तक की यात्रा हो जाती है। वस्तुत: शरीर में स्थित इंद्रियां मेरे कहे अनुसार ही काम करती हैं। शरीर स्वयं से कोई निर्णय नहीं लेता है। मास्टर ट्रेनर श्रीमती आशा असाटी, संजय श्रीवास्तव, अंजना श्रीवास्तव ने भी रिश्ते और फैमिली ग्रुप के माध्यम से प्रतिभागियों से संवाद किया और उन्हें अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने का अभ्यास कराया। ग्रामीण विकास, राजस्व, नगरीय विकास, शिक्षा तथा महिला बाल विकास विभाग के कर्मचारी 3 दिन का आवासीय आनंदम सहयोगी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
अब हितग्राहियों को चक्कर नहीं लगवाएंगे
बड़ामलहरा जनपद क्षेत्र के एक पंचायत सचिव ने कहा कि उन्हें अल्पविराम लेने के बाद यह प्रेरणा मिली है कि वह अब किसी भी हितग्राही को चक्कर नहीं लगवाएंगे उसके आते ही उसका काम पूरा करेंगे। लवकुशनगर क्षेत्र के नगरीय निकाय के कर्मचारी ने कहा कि वह अपना काम और अधिक ईमानदारी से करेंगे। बिजावर क्षेत्र के ग्राम रोजगार सहायक ने कहा कि वह अब अपने काम में टालमटोल नहीं करेंगे। प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि उनका अभी अपनी अंतरात्मा से संपर्क बहुत कमजोर है। बाहरी सुविधाओं पर फोकस अधिक है परिवार तक में संबंधों को ठीक-ठाक नहीं निभा पा रहे हैं। प्रतिभागियों ने यह बात स्वीकार किया कि वह अपने माता-पिता के साथ बैठकर समय नहीं देते हैं उनसे बातचीत नहीं करते हैं। कुछ मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से कर्मचारियों का ध्यान खुद की एकाग्रता योग्यता और क्षमता पर भी दिलाया गया।









