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केन-बेतवा विस्थापितों के लिए लामबंद हुए अमित भटनागर

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छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों और प्रभावित ग्रामीणों के हक में आवाज उठाने वाले प्रखर आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर जेल से रिहा होने के बाद एक बार फिर सरकार और प्रशासन के खिलाफ मुखर हो गए हैं। गुरुवार को छतरपुर जिला मुख्यालय पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अमित भटनागर ने आंदोलन के दौरान ग्रामीणों पर हुए कथित अत्याचारों, पुलिसिया बर्बरता और फर्जी मुकदमों की आशंका को लेकर अपनी बात रखी।अमित भटनागर ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि गत 10 से 14 फरवरी के बीच केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कुचलने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा न केवल ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट की गई, बल्कि कुछ व्यक्तियों के साथ जातिसूचक अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर उन्हें धमकियां भी दी गईं। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा घायलों की समुचित मेडिकल जांच तक नहीं कराई गई है, जिससे ग्रामीणों में भारी असुरक्षा और चिंता की भावना व्याप्त है। अमित भटनागर ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि आंदोलन से जुड़े लगभग 11 साथियों को बिजावर पुलिस स्टेशन में 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध रूप से निरुद्ध रखा गया और उनके साथ अभद्रता की गई। उन्होंने मांग की है कि बिजावर थाना परिसर और घटनास्थल के पास स्थित जानकी निवास प्रांगण के सीसीटीवी फुटेज तत्काल सुरक्षित किए जाएं ताकि पुलिस की कार्रवाई की वास्तविकता जनता के सामने आ सके। उन्होंने आशंका जताई कि आंदोलन को दबाने के लिए सक्रिय कार्यकर्ताओं पर झूठे प्रकरण दर्ज किए जा सकते हैं। अमित भटनागर ने बताया कि उन्होंने कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी को पत्र सौंपकर पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र मजिस्ट्रियल जांच की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच के माध्यम से निर्दोष ग्रामीणों को न्याय दिलाना है। भटनागर ने प्रशासन से मांग की है कि आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं और पुलिस वायरलेस लॉग व ड्यूटी चार्ट जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक विस्थापितों को उनका हक और न्याय नहीं मिल जाता, लोकतांत्रिक तरीके से यह लड़ाई जारी रहेगी।

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