छतरपुर। जिले के किसानों के लिए सोयाबीन की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। सोमवार को बड़ी संख्या में किसानों ने कृषि उपज मंडी छतरपुर से एकत्रित होकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया और भावांतर भुगतान योजना की लंबित राशि को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। किसानों का आरोप है कि प्रदेश सरकार द्वारा राशि जारी किए जाने के बावजूद स्थानीय स्तर पर लापरवाही के चलते उनके खातों में पैसा नहीं पहुँच रहा है।किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से कलेक्टर को अवगत कराया कि उन्होंने छतरपुर कृषि उपज मंडी में भावांतर भुगतान योजना के तहत अपनी सोयाबीन की फसल का विक्रय किया था। योजना के नियमों के अनुसार, खरीदी की प्रारंभिक तिथि 4 अक्टूबर 2025 की राशि का भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन इसके बाद की प्रक्रिया पूरी तरह ठप्प पड़ी है। किसानों का कहना है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा दूसरे और तीसरे चरण की राशि भी जारी की जा चुकी है, लेकिन छतरपुर मंडी से जुड़े हजारों किसानों में से एक को भी इसका लाभ नहीं मिला है। यह स्थिति तब है जब अन्य जिलों में भुगतान की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। ज्ञापन देने आए किसानों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि भावांतर राशि न मिलने के कारण वे गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं। वर्तमान में रबी की फसल की बुवाई और खाद-बीज के लिए नगदी की सख्त जरूरत है। कई किसानों ने साहूकारों और बैंकों से कर्ज ले रखा है, जिसका ब्याज लगातार बढ़ रहा है। घरेलू जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई के खर्च के लिए भी किसानों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि लंबित राशि का भुगतान शीघ्र नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित अधिकारियों ने किसानों की शिकायतों को गंभीरता से सुना और संबंधित विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन की ओर से किसानों को आश्वस्त किया गया है कि तकनीकी बाधाओं को दूर कर जल्द ही पोर्टल के माध्यम से राशि का अंतरण शुरू कराया जाएगा।










