छतरपुर। करीब डेढ़ साल पहले नेपाल का एक युवक भटक कर बागेश्वर धाम जा रहा था लेकिन वह वहां न पहुंच कर छतरपुर में ही रह गया। स्थानीय बस स्टैंड क्रमांक 2 युवक का ठिकाना बन गया। मानसिक विक्षिप्तों के सेवक डॉ संजय कुमार शर्मा ने मंदबुद्धि युवक को टिकट कटवा कर मुजफ्फरपुर के लिए रवाना किया ईश्वर की कृपा से बागेश्वर धाम से लौट रहे मुजफ्फरपुर के दो युवक भी मिल गए जिनके साथ युवक मुजफ्फरपुर पहुंच जाएगा। वहां से सीतामढ़ी होते हुए नेपाल चला जाएगा।नेपाल का रहने वाला आशीष उपाध्याय नेपाल के ही धार्मिक स्थल बालेश्वर जाने के लिए घर से निकला था। मंदबुद्धि आशीष बालेश्वर न जाकर छतरपुर आ गया। शायद किसी ने उसे बागेश्वर धाम जाने की बात समझ कर यहां भेज दिया था। पिछले 18 माह से वह बस स्टैंड क्रमांक 2 में रह रहा था। आशीष मंदबुद्धि होने के बावजूद बेहद ईमानदार है। यदि कोई व्यक्ति उसे 10 रुपए दे तो वह 5 रुपए वापस कर देता था। बिना टिकट वह अपने घर भी नहीं जाना चाहता था, मगर उसके पास टिकट के पैसे नहीं थे। जटाशंकर होटल के संचालक भगवत शरण अग्रवाल ने मंदबुद्धि युवक के बारे में डॉ. शर्मा को बताया डॉ. शर्मा ने उसकी टिकट करवाई और उसे ट्रेन में बैठाकर नेपाल के लिए रवाना कर दिया। बस स्टैंड के लोगों ने आशीष को अपने परिवार का हिस्सा बना लिया था। जन सहयोग रसोई के माध्यम से सुबह नाश्ता मिल जाता था। इसी तरह दोपहर में भोजन और रात में भी कहीं ना कहीं भोजन मिल जाता था जिससे उसका उदर पोषण होता था।हर रोज हनुमान चालीसा के पाठ से ठीक हुई बुद्धिस्थानीय बस स्टैंड के लोगों ने बताया कि आशीष नाम का युवक मंदबुद्धि था, कई बार नाली का गंदा पानी भी पी लेता था। सीधा-सादा 30 वर्षीय युवक भगवान की प्रेरणा से बस स्टैंड में स्थित हनुमान जी के मंदिर के 200 परिक्रमा लगने लगा धीरे-धीरे हर रोज हनुमान चालीसा पढऩे की आदत डाली। दसवीं तक पढ़ाई करने वाले आशीष की बुद्धि हनुमान चालीसा का पाठ करने से सुधर गई और उसने अपने रिश्तेदारों के कुछ नंबर बताए जिनके माध्यम से आशीष के बारे में और जानकारी मिल सकी। फेसबुक के माध्यम से आशीष की मां से संपर्क किया गया लेकिन उनकी बेटे को भिजवाने में कोई रुचि नहीं दिखाई दी। आशीष की मां नेपाल में चाय की दुकान चलाती है।










