छतरपुर। नौगांव पुलिस द्वारा चोरी के संदेह में 4 युवकों के साथ की गई मारपीट का मामला कल से लगातार सुर्खियों में है। बीती शाम पीडि़तों द्वारा जिला मुख्यालय पर एसपी ऑफिस के बाहर शुरु किया गया धरना प्रदर्शन रात करीब 2 बजे तक चला। इस दौरान स्थानीय भाजपा-कांग्रेस के नेता भी मौके पर पहुंचे, जिन्होंने पीडि़तों से मुलाकात की और उनका पक्ष सुनकर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। वहीं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष ने भी फोन पर पीडि़तों से बात की। रविवार की सुबह पुलिस अधीक्षक ने इस मामले में 3 पुलिसकर्मियों को निलंबित करने के साथ ही पीडि़तों की एमएलसी कराई है।
उल्लेखनीय है कि नौगांव थाना क्षेत्र के धर्मपुरा गांव के रहने वाले पांच आदिवासी युवकों, प्रताप, श्रीराम, रितु, मीरा और बालंदी का आरोप है कि गत 15 जुलाई को शाम साढ़े 7 बजे नौगांव पुलिस ने शिकारपुरा रोड से उन्हें विद्युत डीपी का तेल चोरी करने के शक में पकड़ा था, जिसके बाद थाने में उनके साथ बेरहमी से पिटाई की गई और गुप्तांग में मिर्च डालकर यातना दी गई। शनिवार की शाम को पीडि़तों ने भीम आर्मी के साथ एसपी कार्यालय के बाहर धरना शुरू किया, जिसमें बच्चे और महिलाएं भूखे-प्यासे शामिल रहे। समाजसेवियों ने रात 11 बजे बच्चों और महिलाओं को भोजन कराया। इसी बीच कांग्रेस के पूर्व विधायक नीरज दीक्षित, भाजपा युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी ने पीडि़तों से मौके पर पहुंचकर मुलाकात की। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी फोन पर पीडि़तों से बात की। रात करीब 2 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान नौगांव एसडीओपी अमित मेश्राम, सिटी कोतवाली प्रभारी अरविंद दांगी, सिविल लाइन टीआई बाल्मीकि चौबे और ओरछा रोड थाना प्रभारी दीपक यादव भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।
रविवार की सुबह पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नौगांव थाना के एएसआई शिवदयाल, प्रधान आरक्षक अरविंद शर्मा और आरक्षक राम जाट को निलंबित कर दिया और एसडीओपी नौगांव को मामले की जांच सौंपी। इसके साथ ही पीडि़तों को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भी भेजा गया, जिसमें मारपीट किए जाने के आरोप सही पाए गए जबकि गुप्तांग में मिर्च डालने का आरोप सिद्ध नहीं हुआ। फिलहाल नौगांव एसडीओपी अमित मेश्राम मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं।
पहले से सिस्टम की मार झेल रहे परिवारों पर पुलिस ने बरपाया कहर
जिन आदिवासी युवकों पर नौगांव पुलिस ने कहर बरपाया है, उनके परिवार पहले से सिस्टम की मार झेल रहे हैं। जानकारी मिली है कि नौगांव जनपद की ग्राम पंचायत ठठेवरा के धर्मपुरा गांव में करीब 50 आदिवासी परिवार पिछले 20-25 वर्षों से पंचायत की सरकारी जमीन पर झोपडिय़ों में रहते हैं। आधार कार्ड के अलावा इनके पास कोई सरकारी दस्तावेज नहीं है। ये परिवार खजूर की टहनियों से झाड़ू बनाने, कबाड़ बीनने, शादी-विवाह में सफाई, और मवेशियों की खरीद-बिक्री जैसे कामों से गुजारा करते हैं। शासकीय योजनाओं का लाभ इन्हें नहीं मिलता। गांव में शासकीय विद्यालय होने के बावजूद दस्तावेजों के अभाव में इन ?परिवारों के आधा सैकड़ा बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और पढऩे की उम्र में कबाड़ बीनने या झाड़ू बेचने का काम करने को मजबूर हैं। जिस स्थान पर झोपडिय़ों में यह परिवार रहते हैं, वहां बारिश के दिनों में जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना हुआ है। ऐसी दयनीय स्थिति में रहने वाले परिवारों के ही चार युवकों के साथ नौगांव पुलिस द्वारा चोरी के शक में बेतहाशा मारपीट की गई है, जिसमें से एक युवक अभी लापता है।









