छतरपुर। शहर में जहां अधिकांश तालाब गंदगी और उपेक्षा की मार झेल रहे हैं, वहीं संकटमोचन तालाब एक अलग ही मिसाल पेश कर रहा है। बीते चार वर्षों से इस तालाब की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी संकटमोचन समिति और क्षेत्रीय पार्षद आशिफ अली ने अपने कंधों पर ली है। उनके नेतृत्व में समिति लगातार तालाब की स्वच्छता और सौंदर्यीकरण के लिए प्रयासरत है।
जैसे ही मानसून की आहट सुनाई देने लगी, समिति ने एक बार फिर तालाब की सफाई का कार्य शुरू कर दिया है। बारिश से पहले जलभराव की स्थिति से निपटने और जल को स्वच्छ बनाए रखने के उद्देश्य से तालाब में जमे कचरे और सिल्ट को निकाला जा रहा है। समिति अपने स्वयं के खर्च पर मजदूरों की व्यवस्था कर तालाब की सफाई करवा रही है, जो अपने आप में सराहनीय पहल है।
जहां एक ओर शहर के अन्य तालाब प्रशासनिक उपेक्षा के कारण कचरे और गंदगी से पटे पड़े हैं, वहीं संकट मोचन तालाब में स्थानीय नागरिकों और समिति के सामूहिक प्रयासों से साफ-सफाई की मिसाल पेश की जा रही है। यह कार्य सिर्फ जल स्रोत की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
पार्षद आशिफ अली ने बताया कि तालाब हमारी सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर हैं। यदि हम स्वयं आगे आकर इनकी सफाई का जिम्मा नहीं लेंगे, तो आने वाली पीढिय़ों के लिए पानी का संकट और बढ़ जाएगा। हमारा उद्देश्य सिर्फ एक तालाब की सफाई नहीं, बल्कि पूरे समाज को जागरूक करना है।










