Home डेली न्यूज़ सुंदरकांड से संतति और संस्कृति दोनों सुरक्षित रहेंगे: पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

सुंदरकांड से संतति और संस्कृति दोनों सुरक्षित रहेंगे: पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

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छतरपुर। जिले के सिद्धपीठ आश्रम बागेश्वर धाम में विगत रोज जिले भर के सुंदरकांड मंडलों का महासम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में करीब एक सैकड़ा सुंदरकांड मंडल शामिल हुए । बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मंडलों से संवाद करते हुए कहा कि इससे गांव-गांव धर्म की अलग जगेगी और सुंदरकांड पाठ से हमारी संतति के साथ-साथ संस्कृति भी सुरक्षित रहेगी। उन्होंने सुंदरकांड मंडल गठित किए जाने के उद्देश्य और इसके लाभ भी लोगों को बताये।
जानकारी के मुताबिक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत जिले भर के सुंदरकांड मंडल रविवार दोपहर 12 बागेश्वर धाम पहुंचे यहां उन्होंने बालाजी के दर्शन किए इसके बाद अन्नपूर्णा रसोई में इक_े हुये। शाम को सामूहिक सुंदरकांड पाठ हुआ इसके बाद महाराज श्री ने यहां आए सभी सुंदरकांड मंडलों से संवाद किया। बागेश्वर धाम पीठ के महराज श्री ने सुंदरकांड मंडलों के सदस्यों से कहा कि वह गांव गांव सुंदरकांड का पाठ करें और लोगों को इक_ा करें। उन्होंने कहा इस तरह के आयोजन से न केवल बच्चों और परिवार में संस्कार बेहतर रहेंगे बल्कि संस्कृति भी बची रहेगी। सुंदरकांड मंडलों को इक_ा करने में बागेश्वर धाम जन सेवा समिति के सचिव राजेंद्र मिश्रा, छतरपुर मंडल अध्यक्ष राजेंद्र अवस्थी, सुंदर रैकवार, धीरज शर्मा पप्पू, ओमप्रकाश तिवारी, बिहारी लाल गुप्ता बड्डे आदि का विशेष सहयोग रहा।
महाराज श्री ने सुंदरकांड मंडलों को बताए पांच फायदे
बागेश्वर महाराज ने कहा कि सुंदरकांड मंडलों को इक_ा करने का यह उद्देश्य है कि देशभर में सनातन के लिए लोग एकजुट होंगे। देश भर के सुंदरकांड मंडल जुड़ेंगे, शुरुआत जिले से की जा रही है। मंडलों को इक_ा करने से पांच फायदे देखने को मिलेंगे। गांव गांव में सुंदरकांड मंडलों में लोगों को इक_ा किए जाने से जातिवाद का भेद मिटेगा और खंडहर मंदिरों का जीर्णोद्धार होगा, गांव में नशाखोरी रुकेगी, आपसी सौहार्द बढ़ेगा और एक जुटता आएगी, मंडल के माध्यम से लोगों में जुड़ाव बढ़ेगा, इसके अलावा गांव-गांव बालाजी की भक्ति का प्रचार होगा। महाराज श्री ने मंडलों से आह्वान किया कि वह उनकी पदयात्रा में शामिल हो। उन्होंने सभी मंडलों से कहा कि हर तीन माह में बागेश्वर धाम में बैठकर एक मीटिंग होगी जिसमें तमाम बिंदुओं पर चर्चा होगी। सुंदरकांड पाठ के बाद सभी मंडलों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।

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