
छतरपुर। बुंदेलखंड के प्रथम गढ़ाचार्य एवं बुंदेलखंड की आध्यात्मिक शक्ति के महाकेंद्र आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के श्रद्धालुओं एवं शिष्यों ने ध्यान योग भजन कीर्तन एवं णमोकार मंत्रो का जाप कर संपूर्ण भारत के महान संत आचार्य श्री को श्रद्धा सुमन अर्पित किए मतंगेश्वर सेवा समिति के पंडित सुधीर शर्मा ने अपनी स्मृति एवं अनुभवों के दर्शनों को बताते हुए कहा कि आचार्य श्री का विशेष लगाव खजुराहो के मंदिरों से था कुछ महीनो पूर्व उनके प्रमुख अनुयाई मुनि श्री ब्रह्म रूपी जी तथा मेरे निवेदन पर संत श्री ने खजुराहो के समस्त मंदिरों का भ्रमण कर मतंगेश्वर मंदिर के प्रांगण में मीडिया के सामने कहा था कि खजुराहो न सिर्फ भारतवर्ष की बल्कि संपूर्ण विश्व की आध्यात्मिक राजधानी है यहां के सभी मंदिरों में पूजा पाठ करना अति आवश्यक है जिससे समस्त विश्व का कल्याण होगा विदित हो की 2018 के चातुर्मास में ब्रह्मलीन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने भी सभी मंदिरों से प्रदर्शन रोक दर्शन एवं पूजा पाठ करने का आदेश दिया था 7 आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के जीवन परिचय पर अपने उद्बोधन में इंजीनियर सुरेंद्र गुप्ता ने बताया कि आपका जन्म 2 मई 1963 को पथरिया जिला दमोह में हुआ था आपका बचपन का नाम अरविंद कुमार जैन था आपने 9 दिसंबर 1983 को आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज से मुनि दीक्षा लेकर आपका आध्यात्मिक नाम श्री प्रज्ञा सागर जी हुआ श्रद्धांजलि संगोष्ठी में फ्रांस के श्री पर्वत जी महाराज ( फ्रास के पुजारी ) ने शांति पाठ किया अंत में सभी के आहार की व्यवस्था मीरपुआ के श्री कृष्ण मंदिर में की गई इस कार्यक्रम में अमनदीप, अखतुर कृष्णा, राहुल जैन, प्रसन्न महाराज, राधा सखी, श्री मूर्ति जी, हरे रामा हरे कृष्णा, ब्रह्माकुमारी, योग एवं आयुर्वेदिक संगठन तथा एयरबस कंपनी में कार्यरत भारतीय समुदाय के लोगों ने भाग लिया।







