छतरपुर। नागपंचमी के पावन पर्व पर छतरपुर के प्रसिद्ध हनुमान टोरिया मंदिर परिसर स्थित करीब 300 वर्ष पुराने प्राचीन अखाड़े में पारंपरिक दंगल का आयोजन किया गया। करीब 66 वर्षों से चली आ रही कुश्ती परंपरा के तहत आयोजित दंगल में स्थानीय सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए पहलवानों ने अपने दांव-पेच और दमखम का प्रदर्शन किया।
दंगल की शुरुआत हनुमान टोरिया के मुख्य पुजारी राजू महाराज द्वारा भगवान हनुमान जी के विधिवत पूजन के साथ हुई। इसके बाद अखाड़े की मिट्टी तैयार कर परंपरागत रूप से कुश्ती की शुरुआत कराई गई। अखाड़े में पहुंचने वाले पहलवानों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया।
हनुमान टोरिया के सदस्य गिरजा पाटकर ने बताया कि नागपंचमी के अवसर पर इस प्राचीन अखाड़े में वर्षों से दंगल आयोजित होता आ रहा है। बुंदेलखंड केशरी एवं विभिन्न जिलों में हनुमान टोरिया अखाड़े का प्रतिनिधित्व कर चुके स्वामी पटवा पहलवान ने पहलवानों की कुश्ती की शुरुआत कराई।
दंगल में छोटे से लेकर अनुभवी पहलवानों ने रोमांचक मुकाबलों में अपने पारंपरिक दांव-पेच दिखाए। दर्शकों ने तालियों और उत्साहवर्धन से पहलवानों का हौसला बढ़ाया। छोटे पहलवानों के प्रदर्शन ने विशेष रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पहलवानों को पुरस्कृत कर उनका उत्साह बढ़ाया गया।
आयोजकों ने कहा कि अखाड़ा केवल कुश्ती का मैदान नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, अनुशासन, शारीरिक क्षमता और संस्कारों की पाठशाला है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को पारंपरिक खेल और व्यायाम से जोडऩा जरूरी है, ताकि बुंदेलखंड की प्राचीन कुश्ती संस्कृति और अखाड़ा परंपरा आने वाली पीढिय़ों तक जीवित रह सके।
दंगल के समापन पर श्रद्धालुओं और दर्शकों को प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान लालजी पाटकर, स्वामी पहलवान, मनीष वर्मा, गिरजा पाटकर, अशोक असाटी, उमाकांत महतो, सुरेश पहलवान, दीपक गोस्वामी, वीरू पहलवान, बांके पहलवान, सोनू सरावगी, नमित सोनी, गोपाल सोनी, लल्लन घोष, अर्जुन पाटकर सहित बड़ी संख्या में कुश्ती प्रेमी और प्रतिभागी मौजूद रहे।









