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शरीर की आवश्यकता सिर्फ भौतिक, रसायनिक पदार्थ वह भी सीमित सामयिक एवं मात्रात्मक

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शिक्षा महाविद्यालय में सार्वभौमिक मानवीय मूल्य पर संवाद
छतरपुर। राज्य आनंद संस्थान द्वारा शासकीय शिक्षा महाविद्यालय में सोमवार को लगभग 125 छात्राध्यापकों के साथ सार्वभौमिक मानवीय मूल्य पर मास्टर ट्रेनर लखनलाल असाटी ने संवाद किया। इस अवसर पर प्राचार्य एमके त्रिपाठी सहित डॉ. पूर्णिमा मिश्रा, केके जडिय़ा, वीणा गुप्ता एवं भारतभूषण मिश्रा प्रमुख रूप से उपस्थित थे। सत्र के दौरान जीवन मूल्य की शिक्षा और कौशल में उपयोगिता पर विस्तार से बातचीत की गई। लखनलाल असाटी ने कहा कि मानव मैं और शरीर के सहअस्तित्व के रूप में देख पाने पर हमें दोनों की आवश्यकताओं, क्रियाओं और रिस्पोंस में अंतर समझ आता है। शरीर की आवश्यकताएं भौतिक एवं रसायनिक वस्तुओं से पूरी हो जाती हैं और वह भी सीमित सामयिक और मात्रात्मक हैं। मैं की आवश्यकता सुख, सम्मान, स्नेह, विश्वास, प्रेम की है जो भौतिक पदार्थ न होकर फीलिंग्स मात्र हैं और यह आवश्यकता सतत् एवं गुणात्मक है। वर्तमान में जीवन जीने का अभ्यास इस तरह से हो गया है कि मैं की आवश्यकता जैसे सम्मान को प्राप्त करने के लिए सुविधाओं का सहारा लिया जाने लगा है। सामान से सम्मान प्राप्त करने के प्रयास में सुख की गारंटी बने रहने की संभावना सतत् नहीं हो सकती है। कोई सुविधा कुछ समय के लिए सुख दे देती है पर सुविधा बदलते ही सुख की निरंतरता समाप्त हो जाती है।
प्राचार्य एमके त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों के लिए यह सत्र अत्यंत उपयोगी है क्योंकि उनका दायित्व छात्रों का सर्वांगीण विकास करना है। इस अवसर पर केके जडिय़ा एवं भारतभूषण मिश्रा ने भी अपने विचार रखे। छात्रों ने भी सक्रिय रूप से सहभागिता की।

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